दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) ने कर्मचारियों और नियोक्ताओं के लिए अनिवार्य योगदान घटाकर 10 प्रतिशत करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया. अभी कर्मचारी और नियोक्ता मूल वेतन का 12 प्रतिशत ईपीएफ में योगदान करते हैं. ईपीएफओ की बैठक के एजेंडे में कर्मचारियों और नियोक्ताओं के लिए अनिवार्य योगदान घटाकर 10 प्रतिशत किए जाने का प्रस्ताव था. श्रम सचिव एम सत्यवती ने कहा कि नियोक्ता, कर्मचारियों और सरकार के प्रतिनिधियों ने इस पर आपत्ति जतायी और उनका मानना था कि इसे 12 प्रतिशत बने रहना चाहिए. श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय भी इस बैठक में शामिल हुए

दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) का न्यासी बोर्ड अपनी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में अनिवार्य अंशदान को घटाकर 10 प्रतिशत करने के प्रस्ताव को कल मंजूरी दे सकता है. मौजूदा व्यवस्था के तहत कर्मचारी और नियोक्ता कर्मचारी को भविष्य निधि योजना (ईपीएफ), कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) तथा कर्मचारी जमा सम्बद्ध बीमा योजना (ईडीएलआई) में कुल मिलाकर मूल वेतन का 12-12 प्रतिशत का योगदान करना होता है. सूत्रों ने बताया कि ईपीएफओ की बैठक आज यानी 27 मई 2017 को पुणे में होनी है. बैठक के एजेंडे में यह विषय भी है. इसके तहत कर्मचारी व नियोक्ता द्वारा अंशदान को घटाकर मूल वेतन (मूल

दिल्ली श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने गुरुवार को कहा कि वित मंत्रालय ने 2016-17 के लिये कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) पर 2016-17 के लिये 8.65 प्रतिशत ब्याज को मंजूरी दे दी है. मंत्री के इस बयान से संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के बीच बनी इस आशंका पर विराम लग गया है कि उन्हें कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) न्यासी के पिछले साल दिसंबर में मंजूर 8.65 प्रतिशत की दर से कम ब्याज मिलेगा. वित्त मंत्रालय की मंजूरी मिल जाने के बाद ईपीएफओ अब 8.65 प्रतिशत की दर से ब्याज को अपने चार करोड़ अंशधारकों के खातों में डाल सकेगा. मंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा पुरस्कार