अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर कई आंदोलन कर रहे गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने इन घटनाओं के बाद दार्जिलिंग समेत उत्तर बगाल के संपूर्ण पहाड़ी इलाकों में बेमियादी बंद की घोषणा की है. इसका व्यापक असर पड़ा है. इस मौसम में पर्यटकों से गुलज़ार रहने वाले दार्जिलिंग में मौजूद लोग गुरुवार को अपना होटल खाली कर वापस चले गए. इस कारण तमाम होटलों में ताले लटक गए हैं. बंद की घोषणा के बाद दार्जिलिंग में कर्फ्यू-सा नजारा है. लोग अपने घरों में कैद हैं और सड़कों पर या तो पुलिस के जवान हैं या फिर मीडिया वाले. इस बीच सरकार ने यहां सेना,

दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में गुरुवार को हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद हालात तनावपूर्ण हैं. पूरा शहर बंद है. सेना की 8 टुकड़ियां बुलाई गई हैं, जिनमें चार कलिंग्पोंग, 3 दार्जीलिंग और एक कुर्सियोंग में तैनात है. इसके अवाला दूसरे सुरक्षाबलों और राज्य पुलिस की भी तैनाती की गई है. यहां पहले से मौजूद सैलानी परेशान हैं कि कैसे यहां से जल्द से जल्द निकला जाए. गुरुवार को गोरखा मुक्ति मोर्चा के समर्थकों ने जमकर हंगामा किया था. पुलिस पर पथराव किया और कई गाड़ियों को आग लगा दी थी, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था. हालात इतने बिगड़ गए

दार्जिलिंग राज्य मंत्रिमंडल की बैठक स्थल पर जाने की कोशिश कर रहे गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के समर्थकों की गुरुवार को पुलिस से झड़प हुई. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिये लाठी चार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े. पुलिस सूत्रों ने कहा कि जीजेएम समर्थकों ने पुलिस द्वारा लगाये गये बैरीकेडों को तोड़ने की कोशिश की और पथराव किया. उन्होंने पुलिस की कुछ गाड़ियों को नुकसान भी पहुंचाया. इस दौरान कुछ पुलिसकर्मियों को चोट भी आई. प्रदर्शनकारी ‘‘स्कूलों में बंगाली भाषा को थोपे जाने’’ समेत कई मुद्दों को लेकर विरोध कर रहे थे. गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के नेता विमल

इंडियन रेलवे जल्द प्राइवेट कंपनियों को अपने प्राइवेट टर्मिनल्स से मालगाड़ी चलाने की इजाजत दे सकता है। इससे देश के रेलवे नेटवर्क पर भारतीय रेल की मोनोपॉली खत्म हो सकती है। सीमेंट, स्टील, ऑटो, लॉजिस्टिक्स, अनाज, केमिकल्स और फर्टिलाइजर्स सेक्टर की कंपनियों ने रेलवे की स्पेशल फ्रेट ट्रेन ऑपरेशंस स्कीम के तहत अपनी फ्लीट चलाने में दिलचस्पी दिखाई है। इसकी जानकारी एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी ने दी है। अगर यह स्कीम सफल रहती है तो आगे चलकर प्राइवेट पैसेंजर ट्रेन चलाने की जमीन भी तैयार हो सकती है। टाटा स्टील, अडानी एग्रो, कृभको और कई अन्य प्राइवेट कंपनियों के पास पहले