'रक्त ही जीवन है', 'रक्त दान महादान' इस तरह की बातें अक्सर हम सुनते हैं, पढ़ते हैं. लेकिन आपको हैरानी होगी कि पिछले 5 सालों में पूरे भारत में 28 लाख से अधिक यूनिट रक्त और इसके घटकों को निरस्त कर दिया गया है. ये आंकड़ा देश की ब्लड बैंकिंग सिस्टम की गंभीर खामियों को उजागर करता है. ये दिखाता है कि ब्लड बैंकों और अस्पतालों के बीच कोई समन्वय नहीं है. एक अंग्रेजी अखबार की की रिपोर्ट के मुताबिक अगर इसकी लीटर में गणना की जाए तो पिछले 5 साल में 6 लाख लीटर से अधिक रक्त बर्बाद हुआ है.