अरविंद पनगढ़िया ने नीति आयोग के उपाध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा दे दिया है. 31 अगस्त इस पद पर उनका आखिरी दिन होगा. पनगढ़िया शिक्षा के क्षेत्र में वापस लौटना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने इस्तीफा दिया है. इस्तीफा देने के बाद एक इंटरव्यू में पनगढ़िया ने कहा कि मैं पहले कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाता था, मुझे भारत माता की सेवा करने का मौका मिला था. यह सिर्फ एक पड़ाव था, मंजिल नहीं थी. मैं अब वापस लौटना चाहता हूं, मैंने पीएम को बताया था और उन्होंने मंजूरी दे दी थी. पनगढ़िया ने कहा कि कोलंबिया यूनिवर्सिटी से कोई रिटायर नहीं होता है, वहां पर

नीति आयोग के गठन के बाद उसके पहले उपाध्‍यक्ष बने अरविंद पनगढ़िया ने अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया है. वह अब 31 अगस्‍त ही इस पद पर रहेंगे. तात्‍कालिक रूप से शिक्षा क्षेत्र में लौटने की बात कहकर उन्‍होंने इस्‍तीफा दिया है. अरविंद पांच जनवरी, 2015 को नीति आयोग के उपाध्‍यक्ष बने थे. योजना आयोग के नीति आयोग के रूप में गठन के बाद वह इसके पहले उपाध्‍यक्ष बने थे. प्रसिद्ध अर्थशास्‍त्री पनगढ़िया आर्थिक उदारीकरण के पैरोकार माने जाते रहे हैं. भारतीय-अमेरिकी अर्थशास्‍त्री अरविंद नीति आयोग के उपाध्‍यक्ष बनने से पहले कोलंबिया यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर रहे हैं. वह इससे पहले

दिल्ली अर्थव्यवस्था की स्थिति पर ताजा आंकड़ें चिंता का विषय है. वहीं इन आंकडों को लेकर नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने सकारात्मक बात कही है. समाचार एजंसी एएनआई के मुताबिक, उन्होंने दावा किया है कि इस वित्त वर्ष विकास दर 7.5 फीसद तक रहेगी. वहीं उन्होंने यह भी कहा है कि अगले दो सालों में ग्रोथ रेट 8 फीसद पर पहुंचेगा. इसके अलावा पनगढ़िया ने आर्थिक विकास से जुड़े और भी कई पहलुओं पर बात की है. पलायन की स्थिति को लेकर उन्होंने कहा- “पलायन विकास का एक अहम हिस्सा है. पलायन को हमें नकारात्मकता के साथ नहीं देखना चाहिए.