दिल्ली ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में एक नया हलफनामा दायर किया है. बोर्ड ने कहा है कि वह अपनी वेबसाइट, विभिन्न प्रकाशनों और सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स के जरिए लोगों को अडवाइजरी जारी करेगा और तीन तलाक के खिलाफ जागरूक करेगा. बोर्ड ने सोमवार को कोर्ट में 13 पेज का हलफनामा दायर किया. बोर्ड ने बताया कि तीन तलाक की प्रथा को रोकने की कोशिश की जाएगी. बोर्ड के विचारों के प्रसार के लिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तक का इस्तेमाल किया जाएगा. बोर्ड के मुताबिक, निकाह करवाने वाला शख्स सुझाव देगा कि किसी तरह के मतभेद की स्थिति में एक

दिल्ली तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) से पूछा कि क्या महिलाओं को निकाहनामा के समय तीन तलाक को ना कहने का विकल्प दिया जा सकता है. प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने यह भी कहा कि क्या सभी काजियों से निकाह के समय इस शर्त को शामिल करने के लिए कहा जा सकता है. पीठ में न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन, न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति अब्दुल नजीर भी शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस खेहर ने सुनवाई के दौरान एआईएमपीएलबी के

दिल्ली तीन तलाक के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई मंगलवार को भी जारी रही. इस दौरान मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का पक्ष रखते हुए कपिल सिब्बल ने अदालत से कहा कि तीन तलाक की प्रथा 1400 सालों से चली आ रही है, ऐसे में यह असंवैधानिक कैसे हो सकती है. अगर अयोध्या में राम का जन्म आस्था का विषय है तो तीन तलाक क्यों नहीं? इससे पहले केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट तीन तलाक प्रथा को पूरी तरह खत्म कर देती है तो सरकार इसके लिए कानून बनाएगी. इसके साथ ही कहा कि