सु़रक्षाबलों के हाथों मंगलवार को मारे गए दुर्दात आतंकी अबु दुजाना को अपना बेटा बताकर उसके शव पर दावा जताने वाला एक परिवार शुक्रवार को सामने आया। हालांकि डीएनए जांच की बात सुनते ही वह गायब हो गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अनंतनाग के कोकरनाग का रहने वाला एक परिवार शुक्रवार को पुलवामा पुलिस जिला मुख्यालय पहुंचा। इस परिवार के सदस्यों ने अबु दुजाना का असली नाम मुजफ्फर अहमद मागरे और उसके पिता का नाम गुलाम मागरे बताया। उन्होंने बताया कि दुजाना पाकिस्तान का नहीं बल्कि कोकरनाग में चक्की दनीबाट का रहने वाला है। वह 1999 में गायब हो गया था।

कश्मीर में आतंकियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा का शीर्ष कमांडर अबु दुजाना व उसका स्थानीय सहयोगी आरिफ नबी डार मारा गया. वह पाकिस्तानी नागरिक था. जम्मू-कश्‍मीर पुलिस ने पाकिस्तान से कहा है कि वह दुजाना का शव ले जाए. सूबे की पुलिस ने नयी दिल्ली स्थित पाकिस्तान के उच्चायोग से आतंकी अबु दुजाना के शव को पाकिस्तान भिजवाने के लिए संपर्क किया है ताकि उसका अंतिम संस्कार उसके जन्मस्थान पर किया जा सके. सुरक्षा बलों पर कई हमलों के मामलों में वह वांछित था. 'ए ' श्रेणी के आतंकी दुजाना पर 10 लाख रुपये का इनाम

कश्मीर घाटी के पुलवामा जिले में आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. सुरक्षाबलों के साथ हाकरीपोरा गांव में मुठभेड़ में लश्कर कमांडर अबु दुजाना मारा गया है. दुजाना के साथ एक स्थानीय आतंकी आरिफ ललहारी भी मारा गया है. सुरक्षाबलों ने उस घर को आग लगा दी जिसमें आतंकियों के छिपे होने की खबर थी. अबु दुजाना लश्कर का टॉप कमांडर था. पिछले कई महीनों से सुरक्षाबलों ने दुजाना का मारने के लिए कई ऑपरेशन चलाए थे. उसपर सुरक्षाबलों ने 10 लाख का इनाम घोषित कर रखा था. पुलवामा के हाकरीपोरा गांव में सेना ने तड़के

पुलवामा कश्मीर में लश्कर ए तैयबा का कमांडर अबू दुजाना और उसके दो साथियों की तलाशी के लिए सेना ने पुलवामा जिले में सर्च ऑपरेशन ​शुरू कर दिया है. लेकिन सेना को पांचवी बार चकमा देने में वो कामयाब रहा है. कश्मीर में लश्कर का चीफ होने के कारण युवाओं को बरगलाकर वह आतंकी संगठन में शामिल कराता है, इसलिए सुरक्षाबलों को उसकी तलाश है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेना ने उसकी तलाश में सर्च ऑपरेशन मंगलवार रात से ही शुरू कर दिया था, जिसमें दुजाना और उसके साथी घिर गए थे, लेकिन अंधेरे का फायदा उठाकर वे सेना के हाथ से भाग