एक ओर जहां पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड PSEB 10वीं क्लास के नतीजे घोषित खराब आने के बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नाराजगी जाहिर की है और साथ ही उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा मंत्री को शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने के लिए प्रारूप तैयार करने की सख्त हिदायत दी गई है तो दूसरी ओर सवालों के घेरे में पंजाब शिक्षा बोर्ड आ गया है. शिक्षा बोर्ड की मुश्किलें बढ़ाता तरनतारन के खेमकरण से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है दरअसल यहां एक कन्या हाईस्कूल के दसवीं के नतीजे चौंकाने वाले है. इस स्कूल में 64 छात्राओं ने

10वीं और 12वीं कक्षा में दस फीसदी से कम परीक्षा परिणाम देने वाले सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों की इंक्रीमेंट रोकी जाएगी. आपको बता दें कि उच्च शिक्षा निदेशालय ने स्कूल शिक्षा बोर्ड से एक हफ्ते के भीतर दोनों बोर्ड कक्षाओं के परीक्षा परिणाम का पूरा ब्योरा तलब कर लिया है। बोर्ड कक्षाओं में बेहतर नतीजे नहीं देने वाले शिक्षकों पर दबाव बनाने का दौर फिर शुरू हो गया है. पिछले साल भी शिक्षा विभाग ने खराब परिणाम देने वाले शिक्षकों को सस्पेंड करने, इंक्रीमेंट रोकने और तबादले करने की चेतावनियां दी गईं थी. लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ भी नहीं