भारत-पाक सीमा पर स्थित पंचायत घड़खाल के लोगों द्वारा परगवाल-जम्मू सड़क मार्ग जाम कर सीमा सुरक्षा बल और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। गुस्साए लोगों ने तीन घंटे तक सड़क जाम रखी। इसके बाद तहसीलदार अखनूर के आने पर मामला सुलझाया गया। मामले के अनुसार घड़खाल के लोगों ने पाकिस्तान से आए मवेशियों को पकड़ा, क्योंकि किसानों की फसल को मवेशियों ने चौपट कर दिया था। मवेशियों को जब बीएसएफ की 89 बटालियन के हवाले किया तो, बीएसएफ ने मवेशियों को वापस पाक को सौंप दिया। इस कार्यप्रणाली से नाराज होकर घड़खाल के लोगों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया।

केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि घाटी के अनिश्चित और नाजुक हालात को देखते हुए जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एन एन वोहरा को फिलहाल नहीं बदला जाएगा। हालांकि, राज्यपाल के पद के लिए कश्मीर मामले में वोहरा जैसे तजुर्बेकार और उपयुक्त व्यक्ति का नहीं मिलना इसका एक कारण माना जा रहा है। इस मामले में बुधवार को कैबिनेट की बैठक में भी चर्चा हुई। शांति बहाली की कोशिश में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के दौरे के साथ बैक चैनल बातचीत की प्रक्रिया में सरकार उनकी सूझबूझ और लंबे अनुभव का इस्तेमाल करना चाहती है। सरकार ने वोहरा से अपने पद पर बने रहने की

हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से कश्मीर घाटी में जारी हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। बुधवार को कर्फ्यू हटने के बाद सैकडो़ं की तादाद में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे और देश विरोधी प्रदर्शन किए। इस दौरान कुपवाड़ा में उपद्रवियों ने कश्मीरी विस्थापितों की कालोनी पर हमला किया। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक कुपवाड़ा जिले के नतनूसा इलाके में बुधवार को हजारों की तादाद में लोग इकट्ठा हुए और सरकार के विरोध में प्रदर्शन करने लगे। कुछ देर के बाद हजारों की तादाद में उपद्रवियों ने कश्मीरी पंडित मुलाजिमों की कालोनी को ओर रूख किया।

कश्मीर घाटी में कर्फ्यू हटते ही कई इलाकों में हालात फिर से नियंत्रण से बाहर हो गए, जिस वजह से गुरुवार को प्रशासन ने घाटी के कई इलाकों में कर्फ्यू लगाने का फैसला लिया है। पुलिस अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक बुधवार को घाटी के कई इलाकों में हिंसा हुई। इस दौरान सुरक्षा बलों पर जमकर पथराव भी हुआ। जिस पर प्रशासन ने श्रीनगर के एमआरगंज, नौहट्टा और बारामुला जिले के कुछ इलाके में कर्फ्यू फिर से लगा दिया। इसके साथ ही अन्य जगहों पर कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लागू की गई हैं। सुरक्षा बलों द्वारा धारा 144 लागू होने के चलते

विवाहेत्तर संबंध विवाहित जीवन में तनाव पैदा कर रहे हैं। इसकी कई वजह सामने आ रही हैं। इसमें सोशल नेटवर्क मुख्य रूप से शामिल है। इसकी वजह से महिलाएं हिंसा की शिकार भी हो रही हैं। घरेलू कलह सामने आ रही है। राज्य महिला आयोग के आंकड़े बताते हैं कि जम्मू पर यह कितना हावी हो रहा है। रही कसर शराब से निकाल रही है। आयोग के पास कश्मीर संभाग की तुलना में अधिक मामले आ रहे हैं। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष नईमा अहमद मेहजूर ने बताया कि पिछले एक माह में आयोग के पास जम्मू संभाग से करीब 80 मामले

राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि कश्मीर में अशांति के माहौल को समाप्त करने के लिए अलगाववादियों से भी बात की जानी चाहिए। इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकार को बातचीत के लिए मुख्यधारा से अलग पार्टियों तथा पक्षकारों को चिह्नित करना चाहिए। वह पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने संसद तथा सर्वदलीय बैठक दोनों में कहा था कि यदि सरकार जमीनी स्तर पर सुधार चाहती है तो जल्द से जल्द बातचीत की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। इस वजह से बातचीत को केवल मुख्यधारा की पार्टियों तक ही सीमित नहीं

हुर्रियत के बंद के कैलेंडर का पालन न करने वाले दुकानदारों तथा वाहन स्वामियों को हिजबुल मुजाहिदीन ने धमकी दी है। धमकी भरे पोस्टर मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के बीहामा, दुदरहामा तथा सलूरा इलाके में दीवारों तथा बिजली के खंभों पर चिपके पाए गए हैं। पोस्टर में बंद के कैलेंडर का सख्ती से पालन करने की चेतावनी दी गई है। साथ ही धमकी दी गई है कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो जान-माल का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इससे पहले हिजबुल ने वीडियो जारी कर युवाओं को पुलिस भर्ती से दूर रहने की धमकी दी थी।

घाटी के दो थाना क्षेत्रों में ही कर्फ्यू रहने की वजह से तैनाती के एक सप्ताह बाद ही मंगलवार को अचानक श्रीनगर से बीएसएफ को हटा लिया गया। उनकी जगह सीआरपीएफ की तैनाती की गई है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री से मुलाकात में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती तथा केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के दौरे के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की ओर से बीएसएफ को हटाए जाने की मांग को देखते हुए यह फैसला किया गया। ज्ञात हो कि 12 साल के लंबे अंतराल के बाद श्रीनगर में 22 अगस्त को बीएसएफ को तैनात किया गया था। बीएसएफ की

कश्मीर घाटी में कर्फ्यू हटते ही बुधवार को हिंसक प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया। इस दौरान एक युवक के मौत की खबर आ रही है। उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के लाडोरा इलाके में लोग प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी दौरान भीड़ में से कुछ युवकों ने सुरक्षा बलों पर पथराव शुरू कर दिया। शुरूआत में सुरक्षा बलों ने संयम बरता लेकिन जब स्थित नियंत्रण से बाहर होने लगी तो जवानों ने आंसू गैसे के गोले दागे और हवाई फायरिंग की। इस फायरिंग में एक युवक की मौत हो गई जबकि पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल

कश्मीर में चल रही अशांति ने महिलाओं और युवतियों को मानसिक तनाव का शिकार बना दिया है। हालांकि इसमें हर एक वर्ग शामिल है, लेकिन सबसे ज्यादा असर महिलाओं, युवतियों और छोटी बच्चियों पर पड़ा है। बंद कमरे में गुजर रही जिंदगी से महिलाएं और युवतियां तनाव में हैं। ऐसे माहौल ने उन्हें चिड़चिड़ा बना दिया है। यही नहीं, पेलेट गन से घायल हुई महिलाएं एवं युवतियां डिप्रेशन में हैं। राज्य महिला आयोग ने हिंसा के बीच जिंदगी बसर कर रही महिलाओं की पड़ताल की तो यह सब सामने आया। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष नईमा अमहद मेहजूर का कहना है कि