सीमा पर हालातों की गंभीरता को देखते हुए सीमांत गांवों से विस्थापित कराए लोगों को पर्याप्त सुविधाएं मुहैया कराने के लिए जम्मू-कश्मीर के प्रशासन ने कमर कस ली है । हालातों की निगरानी और सुरक्षा के मद्देनजर जिला उपायुक्त सिमरनदीप सिंह ने सभी तहसीलों के अधिकारियों के साथ रातभर संपर्क कर उन्हें अपनी-अपनी तहसीलों में ही रुकने के आदेश दिए हैं। उन्होंने सभी अधिकारियों को सुरक्षा से संबंधित पल- पल की जानकारी डीसी आफिस में बनाए गए रिपोर्टिंग रूम में देने की कड़ी हिदायतें दी हैं। यही नहीं, किसी भी प्रकार की जरूरी सूचना को आपस में कम से कम समय में

थलसेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग आज जम्मू-कश्मीर के दौरे पर आ रहे हैं । सेना प्रमुख शनिवार सीमा पर हालातों की समीक्षा के लिए सेना के अधिकारियों के साथ बैठक करने ऊधमपुर पहुंच गए हैं । प्राप्त जानकारी के अनुसार सेना प्रमुख सेना की पश्चिमी और उत्तरी कमान के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे । जानकारी के मुताबिक इस बैठक में सेना प्रमुख सीमा के हालातों और सुरक्षा से संबंधित इंतजामों पर समीक्षा बैठक करेंगे । गौरतलब है कि पीओके में आतंकी ठिकानों पर भारतीय सेना के सर्जिकल स्ट्राइक करने के बाद से ही जम्मू-कश्मीर समेत सारे देश में सुरक्षा को लेकर

यह हैरत भरा सच है कि केंद्रीय गृहमंत्रालय की एडवाइजरी और प्रशासन की हिदायतों के बाद भी इस बार सरहद और नियंत्रण रेखा पर बसा कोई भी गांव खाली नहीं हुआ है। एहतियातन जिन परिवारों की महिलाओं और बच्चों ने वीरवार की रात कैंपों या रिश्तेदारों के घर बिताई भी वे शुक्रवार को पौ फटते ही अपने-अपने घरों में पहुंच गए। हालांकि कुछ लोगों ने अपने परिवार सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाए भी हैं। ऐसे 50 से भी अधिक गांवों में पहुंचीें अमर उजाला की टीमों से इन गांवों के वाशिंदों का कहना था कि अब कुछ भी हो जाए, हम अपनी

1999 के कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सेना पर भारत की शौर्य विजय का साक्षी बना कारगिल आज भी भारतीय सेना की उन वीर कहानियों को बयान करता है । सीमा पर उपजे विवादों के बीच कारगिल में आज भी सेना के आपरेशन विजय के वो किस्से सुनाए जाते हैं जिनके पराक्रम के बल पर भारतीय सेना के जवानों ने पाक के नापाक मंसूबों को नाकाम कर दिया था । तस्वीरों में देखें कारगिल युद्ध के 17 साल बाद अब कैसा दिखता है कारगिल कारगिल जम्मू और कश्मीर का एक जिला है । जिले का मुख्यालय कारगिल है । यह श्रीनगर से

आतंकवाद के खिलाफ पीओके में भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक से आतंकवादी दहशत में हैं। ऐसी सूचना है कि लगभग 300 आतंकी कैंप छोड़कर भाग गए हैं। मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ भारत के सर्जिकल स्ट्राइक से पहले वहां 500 से अधिक आतंकी कैंपों में थे। मुंबई हमले के गुनहगार अजमल कसाब को जिस कैंप में ट्रेनिंग दी गई थी, उस कैंप से भी आतंकी भाग गए हैं। उनको अपने मारे जाने का डर सता रहा है। ये कैंप मुजफ्फराबाद के पास है। बताया जा रहा है कि 24 कैंपों से आतंकी अपने

उरी में हुए आतंकी हमले में जख्मी एक जवान की मौत हो गई, जिसके बाद इस हमले में शहीद जवानों की संख्या 19 हो गई। गुरुवार को अपराह्न सैनिक अस्पताल नई दिल्ली में उनका निधन हुआ। मृतक जवान नायक राजकिशोर सिंह आरा के रहनेवाले थे। सूचना के बाद आरा के बड़हरा प्रखंड के पिपरपांती गांव में मातम पसर गया। उरी में शहीद राजकिशोर सिंह 6 बिहार बटालियन में तैनात थे। हमले में वे घायल हो गए थे। उनका इलाज दिल्ली में चल रहा था। आज पटना एयरपोर्ट पर लाया जाएगा शव शहीद राजकिशोर सिंह का पार्थिक शरीर शुक्रवार को सैनिक सम्मान के साथ

अपने क्षेत्र में भारतीय सेना के सर्जिकल हमले से पाकिस्तान बौखला गया है। इस हमले की घोषणा के कई घंटे बाद पाक ने एक भारतीय जवान को पकड़ने और 8 सैनिकों को मारने का दावा किया। वहीं भारतीय सेना ने इस खबर को एकदम झूठ और बेबुनियाद करार दिया है। पाकिस्तान के प्रमुख मीडिया समूह डॉन ने सैन्य सूत्रों के हवालों से कहा कि पाक सेना ने एलओसी के अग्रिम मोर्चे पर भारतीय सेना की गोलीबारी के दौरान एक भारतीय जवान को पकड़ लिया है। डॉन के अनुसार, यह वाकया तत्ता पानी इलाके में घटी। अखबार के मुताबिक, भारतीय जवान की पहचान

भारतीय सेना के सर्जिकल आपरेशन की तैयारियों से सहमे पाकिस्तान ने पीओके के 12 आतंकी कैंपों को बंद कर दिया है। इसके अलावा छह आतंकी प्रशिक्षण कैंपोँ को ठिकाने बदल दिए गए हैं। इन कैंपों को एलओसी से हटाकर पीओके के अंदरुनी जंगली इलाकों में ले जाया गया है। पीओके में 45 से 50 आतंकी प्रशिक्षण शिविर हैं जिनमें से 42 के बारे में भारतीय सेना के पास पुख्ता इनपुट हैं। एलओसी पर पाकिस्तान सेना की तैनाती भी बढ़ी है और एलओसी पर उड़ी के अलावा घाटी के कई इलाकों में पीओके के गांव खाली कराए गए हैं। हांलाकि भारतीय सेना किसी

आमतौर पर कश्मीर में हिंसा और सेना के विरोध की तमाम खबरें देखने को मिलती हैं । सेना और प्रदर्शनकारियों की झड़प की तमाम तस्वीरों के पीछे भारतीय सेना का एक ऐसा चेहरा भी है जो देश के बहुत से लोगों को पता न हो । कैसे भारत की सेना कर रही है कश्मीर के बच्चों के सपनों को पूरा आमतौर पर कश्मीर में हिंसा और सेना के विरोध की तमाम खबरें देखने को मिलती हैं । सेना और प्रदर्शनकारियों की झड़प की तमाम तस्वीरों के पीछे भारतीय सेना का एक ऐसा चेहरा भी है जो देश के बहुत से लोगों

दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में सीआरपीएफ की पेट्रोलिंग पार्टी पर आतंकियों ने ग्रेनेड से हमला किया है । इस हमले में सीआरपीएफ के 5 जवान घायल हुए हैं । आतंकियों का हमला उस वक्त हुआ है जब ये जवान अपनी रूटीन हाइवे पेट्रोलिंग पर निकले हुए थे । प्राप्त जानकारी के अनुसार अनंतनाग के वनपोह में सीआरपीएफ के इन जवानों पर हमले के बाद सेना और सीआरपीएफ के उच्च अधिकारी यहां पहुंच गए हैं । घटना के बाद पूरे इलाके को घेर कर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है । इस हमले में घायल हुए सभी सीआरपीएफ जवानों को अस्पताल