गाजियाबाद में बक्सर के डीएम ने किया सुसाइड, नीतीश कुमार ने शोक जताया

बक्सर जिले के डीएम मुकेश पांडेय की आत्महत्या की खबर सुनते ही उनके पैतृक जिले सारण के दरियापुर के सांझा गांव में मातम फैल गया है, किसी को भरोसा नहीं हो रहा है कि खुशमिजाज और मिलनसार मुकेश ने सुसाइड कर लिया है ।

सबकी जुबां पर एक ही सवाल है कि सिविल सर्विस में 14वीं रैंक लाकर आईएएस बनने वाले मुकेश ने ऐसा क्यों किया? पूरे गांव में इस बात की चर्चा लोग कर रहे हैं। डीएम बनने पर गांव के जिस बेटे पर लोग फक्र कर रहे थे, उसकी मौत के बाद अब सबकी आंखें नम हैं।

मुकेश की दादी कौशल्या कुंवर ने कहा कि मुकेश की शादी बड़ी धूमधाम से हुई थी, उसकी एक बच्ची भी हुई है। बच्ची के जन्म पर मुकेश के पिता ने पूरे गांव में मिठाई बांटी थी। बता दें कि मुकेश के पिता गुवाहाटी में डॉक्टर हैं।

गांव के लोग एक ही सवाल पर चर्चा कर रहे हैं कि स्वभाव से खुशमिजाज मुकेश ने आखिर क्यों सुसाइड किया? पैतृक घर पर मुकेश के परिवार का कोई नहीं रहता है। घर की देखरेख पड़ोसी करते हैं। मुकेश के चाचा अनिल पांडेय ने कहा कि हमलोगों का परिवार संयुक्त था। डीएम साहब काफी मिलनसार थे। घटना के बाद काफी दुख हुआ है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी ट्वीट कर मुकेश की मौत पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने पोस्ट किया कि जिलाधिकारी, बक्सर मुकेश पाण्डेय की मौत ह्रदयविदारक है। वह कुशल प्रशासक और संवेदनशील पदाधिकारी थे। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें।

 

मुकेश पाण्डेय मूल रूप से सारण जिले के दरियापुर से सांझा गांव के रहने वाले थे। हालांकि उनकी परवरिश गुवाहाटी में हुई थी। उनके पिता वहीं कार्यरत हैं। मुकेश ने 10वीं की परीक्षा गुवाहाटी के फैकल्टी हायर सेकेंडरी स्कूल से पास की थी, जबकि इण्टरमीडिएट की परीक्षा गुवाहाटी के मारिया पब्लिक स्कूल से पास की थी। उन्होंने गुवाहाटी के प्रतिष्ठित कॉटन कॉलेज में एडमिशन लिया था। यहां से मुकेश ने बीए ऑनर्स की पढ़ाई की। ग्रेजुएशन के बाद मुकेश दिल्ली गए और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की। पहले प्रयास में असफल होने के बाद दूसरे प्रयास में वह सफल रहे।

गुरुवार की रात गाजियाबाद स्टेशन से एक किमी. दूर कोटगांव के पास रेलवे ट्रैक पर उनका कटा हुआ शव मिला। 2012 बैच के आईएएस मुकेश की 4 अगस्त को ही पहली बार डीएम के रूप में बक्सर में पोस्टिंग हुई थी। दो दिनों की छुट्टी पर गुरुवार सुबह डीडीसी को प्रभार देकर वह वाराणसी होकर विमान से दिल्ली गए थे। वहां चाणक्यपुरी में होटल लीला पैलेस के कमरा नंबर 742 में ठहरे थे।

डीएम का सुसाइड लेटर

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