गुड़िया गैंगरेप हत्याकांड: CBI को फोरेंसिक जांच में मिला अहम सुराग

गुड़िया गैंगरेप हत्याकांड मामले में सीबीआई को फोरेंसिक जांच में कातिलों के जैविक तरल पदार्थ मिले हैं। सीबीआई के सूत्र इसे बड़ी लीड मान रहे हैं। इससे फोरेसिक विशेषज्ञों को अपराधियों का डीएनए मिल सकता है। सीबीआई सूत्रों की मानें तो फोरेसिंक जांच में गुड़िया के शव और घटनास्थल से प्राप्त नमूनों में अहम सुराग मिले हैं।
ये जैविक पदार्थ गुडिया की कोशिकाओं के गुणसूत्रों से अलग बताए जा रहे हैं। हालांकि, अभी इसकी अंतिम रिपोर्ट आने में तीन-चार दिन का वक्त लग जाएगा। यही डीएनए गुड़िया से दुराचार के बाद उसका कत्ल करने वाले को बेनकाब कर सकता है।
दर्जनों लोगों से लंबी पूछताछ के बाद सीबीआई की विशेष जांच टीम ने अपना रुख फोरेंसिक सबूतों की तरफ किया। पिछले सात दिनों में सीबीआई की एक टीम जुन्गा स्थित स्टेट फोरेंसिक सांइस लैब के आधा दर्जन चक्कर लगा चुकी है। यहां से नमूने लेकर टीम उसे दिल्ली की विशेष फोरेसिक लैब में जांच के लिए भेज चुकी है।

दिल्ली की लैब से उसे अहम सुराग मिल रहे हैं। सीबीआई के सूत्रों ने बताया कि इस डीएनए से कातिलों का खुलासा हो सकता है। फोरेंसिक विशेषज्ञों ने गुड़िया के शव, कपड़ों और घटनास्थल से जुटाए एक-एक नमूने का बारीकी से निरीक्षण किया है। मिले पदार्थ की महीनता से जांच हो रही है। इससे डीएनए निकालने की प्रक्रिया चली हुई है।

फोरेंसिक के अब तक नतीजों के अनुसार गुडिया के शव और कपड़ों से कोशिकाओं के मिले नमूने सुरक्षित हैं। उन्हें शव के प्राइवेट पार्ट से तरल जैविक पदार्थ भी मिले जो गुडिया के नहीं थे। उसके साथ यह दरिंदगी करीब पौने घंटे तक की गई। इससे उसके भीतर जख्म का एक गहरा निशान भी मिला है।

गैंग रेप हुआ या एक ही आदमी ने दुराचार किया? इसका भी अभी तक क्लीयर रिजल्ट नहीं आया है। गुड़िया के आंखों, नाक और मुंह के अलावा पेट से नीचे के जख्मी हिस्से में जंगली फ्लाई के अंडे मिले हैं। इससे यह लगता है कि उसे चार जुलाई को ही मार दिया गया था।

विशेषज्ञों के मुताबिक शव पर आक्रमण करने वाली फ्लाई की गंध इतनी तीव्र होती है कि वह दो किलोमीटर दूर से भी शव के पास आ सकती है। एक अहम बात यह भी फोरेंसिक टीम को अप्राकृतिक दुराचार के निशान नहीं मिले हैं, जैसा कि पुलिस का दावा था।

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