हिमाचल पर्यटन को नंबर वन बनाने की तैयारी, 100 करोड़ का प्रोजेक्ट मंजूर

हिमाचल की सैर के लिए आने वाले सैलानियों के लिए खुशखबरी है। प्रदेश में पर्यटन को नए पंख देने के लिए हिमालयन टूरिज्म सर्किट प्रोजेक्ट के तहत सौ करोड़ रुपये की रकम मंजूर की गई है। इस प्रोजेक्ट में हिमाचल प्रदेश में पर्यटन से जुड़ी 14 परियोजनाओं को विकसित करने का मार्ग प्रशस्त होगा।

शुक्रवार को शिमला में हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता करते हुए सीएम वीरभद्र सिंह ने ये जानकारी दी। हिमालयन टूरिज्म सर्किट प्रोजेक्ट में सोलन के क्यारीघाट में सैलानियों के लिए सभी प्रकार की सुविधाओं वाले सम्मेलन केंद्र पर 25 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा संजौली-ढली बाईपास के समीप 7 करोड़ रुपये के हैलीपोर्ट का निर्माण किया जाएगा। डल झील के सौंदर्यीकरण सहित कांगड़ा ‘विलेज हार्ट’ इन दोनों प्रोजेक्ट्स के लिए चार-चार करोड़ रुपयेमंजूर हुए हैं।

वहीं मनाली में इंटरनेशनल लेवल के ‘नि:शुल्क क्लाईबिंग-स्टेंडिंग वॉल के लिए तीन करोड़ तथा सौरव कालिया वन विहार के लिए तीन करोड़ रुपये के प्रावधान सहित शिमला के सुन्नी में वॉटर स्पोट्र्स सुविधाओं को विकसित करना शामिल है। शिमला के एक पहाड़ी पठार पर बनने वाले हैलीपोर्ट में इंडोर व आउटडोर के अलावा निजी हेलिकाप्टरों के उतरने की सुविधा भी होगी।

बैठक में सीएम वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर रोपवे के निर्माण के बाद हिमाचल धार्मिक और साहसिक पर्यटन के विश्व मानचित्र पर उभरेगा। सीएम ने कहा कि बीओटी यानी ‘बिल्ट-ऑपरेट-ट्रांसफर’ आधार पर चार रोपवे परियोजनाओं के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इन परियोजनाओं में 150 करोड़ रुपये की धर्मशाला-मैकेलोड़गंज, 289 करोड़ रुपये की आदी-हिमानी-चामुंडा, 340 करोड़ रुपये की पलचान-रोहतांग तथा लगभग 94 करोड़ रुपये की भुंतर-बिजली-महादेव रोपवे परियोजनाएं शामिल हैं। साथ ही किन्नौर जिला को जोड़ते हुए सराहन से बशाल-कंडा रोपवे परियोजना, भरमौर से भरमाणी माता, बिलासपुर में टोबा से श्री नैनादेवी जी तथा हमीरपुर में शाहतलाई से दियोटसिद्ध रोपवे मार्ग परियोजनाओं में टेंडर प्रक्रिया जारी है।

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