विदेश नीति पर संसद में बोली सुषमा स्वराज- आज अमेरिका और रुस दोनों हमारे साथ हैं

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आज राज्यसभा में मोदी सरकार की विदेश नीति पर विस्तार से जवाब दिया. सुषमा ने कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष के सवालों और आरोपों पर जवाब दिया. सुषमा ने कहा कि आज सामरिक ताकत नहीं आर्थिक ताकत ज्यादा महत्वपूर्ण है. उन्होंने चीन-भारत डोकलाम विवाद का हल बातचीत से निकालने की बात कही. क्या क्या कह रही हैं सुषमा पढ़ें-

-श्रीलंका में बाढ़ आई सबसे पहले कौन पहुंचा, भारत, नेपाल में भूकंप आया सबसे पहले कौन पहुंचा, भारत. नेपाल को सबसे बड़ी राशि भारत ने 1 लाख बिलियन डॉलर भारत ने दिया. 17 साल में कोई पीएम नेपाल नहीं गया था. 12 साल आपकी सरकार थी आनंद शर्मा जी. जिस नेपाल से संबंधों की बात करते हैं, 17 साल तक जब पीएम ना जाए तो संबंध अच्छा, जो पीएम दो-दो बार जाए तो संबंध खराब.

-श्रीलंका में हम्बनटोटा में काम शुरू हुआ 2006 में, किसकी सरकार थी. 2011 में कोलंबो में काम शुरू हुआ. ग्वादर का काम शुरू हुआ, किसकी सरकार थी मैं पूछना चाहती हूं. आज आपको कन्सर्न याद आ रहा है. आज आप हमारी विदेश नीति पर बोल रहे थे. उस कन्सर्न के जन्मदाता आप हैं.

– हमारी विदेश नीति पर आप सवाल मत उठाइए. हम्बनटोटा में हमने आपके कन्सर्न को एड्रेस किया. बांग्लादेश की पीएम यहां आए, हमने ऐसा क्या किया जो वहां असर पडे़गा. हमने मनमोहन जी को उनका श्रेय दिया.

-आपने कहा पाकिस्तान का रोडमैप. हमने सारे सार्क देशों को शपथग्रहण समारोह में बुलाया था. अगले दिन द्विपक्षीय बैठक हुई थी. दो साल में बहुत उतार चढ़ाव आए. 9 दिसंबर 2015 को हार्ट ऑफ एशिया में हिस्सा लेने पाकिस्तान गई थी. तब नवाज शरीफ ने कहा था कि ठोस द्विपक्षीय  बात शुरू हो. दोनों विदेश मंत्री मुद्दे तय करें.

-प्रधानमंत्री का अचानक लाहौर जाना आउट ऑफ द बॉक्स इनिशिएटिव था. नवाज का जन्मदिन था तो पीएम मोदी ने बधाई दी थी. तब नवाज शरीफ ने कहा कि यहां आ जाइए, तब हमारे पीएम अफगानिस्तान से वहां पहुंच गए. कहानी बदरंग तब हुई जब बुरहान वानी का यहां एनकाउंटर हुआ और नवाज शरीफ ने उसे शहीद बता दिया. हमने तो रोडमैप बना दिया था. आतंक और बातचीत साथ नहीं हो सकती. यहीं हमारा रोडमैप है.

-मैं बहुत दुखी हूं कि सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता ने हमसे पूछने की बजाए चीन के राजनीतिक नेतृत्व से मिले. शायद आप भी (आनंद शर्मा) उस मीटिंग में थे. चीन के राजदूत से उनका पक्ष सुना. हमने सोचा कि सभी राजनीतिक दलों को इससे अवगत कराना चाहिए. इसलिए हमने अलग-अलग पार्टी से मिलने का कार्यक्रम रखा. मैंने उनके पूछा क्या अब मीटिंग खत्म करूं. उन्होंने कहा हां, इसके बाद मैं वहां से निकली. इस तरह की चीजों को सुलझाने में धैर्य और भाषा की बहुत जरूरत होती है. हम धीरज भी बनाए हैं, भाषा संयम भी बनाए हुए हैं. हमने अपनी ओर से पहली की और सबको बताया कि चीन और भूटान के बीच क्या मुद्दा है और भारत का क्या स्टैंड है.

रामगोपाल जी ने कहा युद्ध की तैयारी, मैं कहना चाहूंगी कि सेना तो तैयार रहती है. किसी भी समस्या का समाधान युद्ध से नहीं होता. जीते हारे लोग भी टेबल पर बैठते हैं और बात करते हैं. यही समझदारी है. जहां तक तैयारी का सवाल है सेना है, वह युद्ध के लिए ही होती है. समझदारी है कि बातचीत से मामला सुलझाया जाए. युग बदल गया है रामगोपाल जी, अब सामरिक ताकत से नहीं आर्थिक ताकत से देश पहचाने जाते हैं. आज पड़ोसियों को अपने विकास में आर्थिक मदद चाहिए. आज आर्थिक ताकत बढ़ाने की जरूरत है. इसमें चीन की भी बहुत बड़ी भूमिका है.

सुषमा ने अमेरिकी एच1 वीजा की बात करते हुए कहा कि ‘जब दिसंबर 2004 में यूपीए की सरकार थी तो एक बिल पारित हुआ और संख्‍या 65,000 कर दी गई, इसके अलावा वहां से पीएचडी करते हुए 20 हजार यानी कुछ 85 हजार लोगों को वीजा मिलता था। ये स्‍पाउज वीजा की जो बात कर रहे हैं, यह मोदी सरकार ने दिलाया है। ये मोदी सरकार की सफलता है कि आज रूस भी भारत के साथ है और अमेरिका भी हमारे साथ है।”

 

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