बारालाचा दर्रे के नीचे सुरंग बनाने की तैयारी में रक्षा मंत्रालय, 16 हजार फीट ऊंचाई पर बनेगी 13 किमी लंबी सुरंग

सरहद पार चीन की संदिग्ध गतिविधियों के बीच भारत ने लद्दाख से सटे सीमांत इलाकों की किलाबंदी शुरू कर दी है। रोहतांग टनल के बाद रक्षा मंत्रालय अब मनाली-लेह सामरिक मार्ग में आने वाले 16 हजार फीट ऊंचे बारालाचा दर्रा के नीचे से भी सुरंग बनाने की तैयारी में है।

लद्दाख में चीन की अंतरराष्ट्रीय सीमा तक जाने वाले मनाली-लेह मार्ग को साल भर वाहनों की आवाजाही के लिए खुला रखने के लिए बारालाचा दर्रा के नीचे सुरंग बनाना बेहद जरूरी है। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण मनाली-लेह मार्ग करीब छह महीने तक बंद हो जाता है। ऐसे में इस दौरान लद्दाख में सेना की रसद सप्लाई हवाई सेवा से ही संभव हो पाती है।

मार्ग के महत्व को देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने बारालाचा के नीचे करीब 13 किमी लंबी सुरंग बनाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। बीआरओ दीपक प्रोजेक्ट के मुख्य अभियंता मोहन लाल ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि सब कुछ ठीक रहा तो इसी साल बारालाचा सुरंग की फिजिबिलिटी रिपोर्ट पर काम शुरू हो जाएगा।

कारगिल युद्ध के दौरान मनाली-लेह मार्ग सेना के लिए लाइफ लाइन साबित हो चुकी है। बताया जा रहा है कि रोहतांग सुरंग बनने के बाद भी भारतीय सेना सर्दियों में लद्दाख क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सीमा तक नहीं पहुंच सकती है।

मुख्य अभियंता मोहन लाल ने बताया कि सीमा तक आसानी से पहुंचने के लिए पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में करीब आधा दर्जन और सुरंगों का निर्माण पाइप लाइन में है।

बारालाचा दर्रा में सुरंग बनने से मनाली-लेह मार्ग की दूरी घटने से सेना को बॉर्डर तक पहुंचने में बेहद कम समय लगेगा। कारगिल तक पहुंचने के लिए शिंकुला दर्रा में भी करीब तीन किमी लंबी सुरंग बनाने की योजना है।

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