पुण्यतिथि विशेष: जानिए, मोहम्मद रफी की जिंदगी से जुड़े 10 किस्से

मोहम्मद रफी के बारे में ये कहना बड़ा मुश्किल है कि वे इंसान बड़े थे या कलाकार. कुछ ऐसा ही जादू था मोहम्मद रफी का लोगों पर. रफी साहब ना सिर्फ एक बेहतरीन सिंगर थे, बल्कि एक लाजवाब इंसान भी थे.

13 साल की उम्र में अपनी गायकी का सफर शुरू करने वाले मोहम्मद रफी ने अपने जीते-जी कई लोगों को प्रभावित किया. आज उनकी पुण्यतिथि पर आइए जानते हैं उनकी जिन्दगी से जुड़े कुछ ऐसे ही अनछुए पहलुओं के बारे में.

1. मोहम्मद रफी का जन्म अमृतसर के पास कोटला सुल्तान में 24 दिसंबर 1924 को हुआ था, इसके बाद उनका परिवार 1932 में लाहौर चला गया.

2. लाहौर में अपने होने वाले जीजा की मदद से रफी साहब मुंबई आए, जहां उन्होंने गायकी की ट्रेनिंग लेना शुरू कर दिया. रफी ने अपना पहला गाना श्याम सुंदर की फिल्म ‘गांव की गोरी’ के लिए गाया. इस गाने को उन्होंने जीएम दुरानी के साथ मिलकर गाया था.

3. लोगों का मानना था कि मोहम्मद रफी की आवाज शम्मी कपूर पर सबसे ज्यादा फबती थी. लेकिन मोहम्मद रफी के पसंदीदा एक्टर शम्मी कपूर नहीं बल्कि राजेंद्र कुमार थे. जिनको टीवी पर देखते ही रफी मानो खो से जाते थे.

4. रफी की गायकी के लिए मोहब्बत को इसी से समझा जा सकता है कि जब भारत-पाकिस्तान का विभाजन हुआ था तब उस समय उनकी पहली पत्नी ने भारत में रुकने से मना कर दिया था. ऐसे में रफी ने यह फैसला किया कि वो अपने पहले प्यार यानी सिंगिंग के खातिर मुंबई में ही रुकेंगे. जिसके बाद वो अपनी पहली पत्नी से अलग हो गए.

5. एक बार संजय गांधी किशोर कुमार से बेहद नाराज हो गए थे. उन्हें मनाने और किशोर कुमार को संजय गांधी के गुस्से से बचाने के लिए खुद मोहम्मद रफी ने खासतौर से संजय गांधी से मुलाकात की थी.

6. 31 जुलाई 1980 को जब रफी साहब इस दुनिया को अलविदा कह गए. मौत के बाद किशोर कुमार रफी के पैरों के पास ही बैठ कर घंटों तक बच्चों की तरह रोते रहे.

7. मोहम्मद रफी का दिल काफी बड़ा था. एक बार उन्होंने अपनी कॉलोनी में एक विधवा को पैसे ना होने के कारण जूझते हुए देखा. उसके बाद से ही रफी ने पोस्ट ऑफिस के जरिए एक अनजान व्यक्ति के नाम से हर महीने उस विधवा को पैसे भेजना शुरू कर दिए.

8. मोहम्मद रफी को संगीत से बेहद प्यार था और वो इसे पैसों के तराजू में कभी नहीं तौलते थे. ऐसे में जब उस दौर में लता मंगेशकर सहित कई सिंगर्स ने अपने पैसे बढ़ाने की मांग करना शुरू कर दी तो रफी इस कदर नाराज हो गए कि उन्होंने लता मंगेशकर के साथ कभी ना गाने का फैसला कर लिया.

9. अपने करियर के दौरान रफी हमेशा टॉप पर ही रहे. मन्ना डे के मुताबिक वो और किशोर कुमार हमेशा दूसरी पोजिशन के लिए लड़ा करते थे, क्योंकि उन्हें पता था कि पहली पोजिशन पर हमेशा मोहम्मद रफी ही कायम रहेंगे.

10. मोहम्मद रफी के लिए लोगों की मोहब्बत कितनी थी इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब मुंबई में रफी का जनाजा निकाला गया तो उसमें करीब 10 हजार लोग शामिल हुए थे. रफी के गुजर जाने पर दो दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया था.

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