215 रुपए का फ्रीडम मोबाइल देने वाली कंपनी ‘रिंगिंग बैल्स’ पर ED कस सकता है शिकंजा

251 रुपये में फ्रीडम मोबाइल फोन और 2999 रुपये में फोर-जी स्मार्ट फोन देने का दावा करने वाली रिंगिंग बेल कंपनी द्वारा किए गए करोड़ों के घोटाले की जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर सकता है। शुक्रवार को दिल्ली ईडी के एक इंस्पेक्टर गाजियाबाद पहुंचे और केस संबंधी दस्तावेज जुटाए।

बता दें कि फरवरी में सिहानी गेट थाने में रिंगिंग बैल कंपनी के एमडी मोहित गोयल समेत पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इस मामले में पुलिस ने कंपनी के एमडी मोहित गोयल समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

नेहरूनगर स्थित आयाम इंटरप्राइजेज के मालिक अक्षय मल्होत्रा द्वारा नोएडा सेक्टर 63 स्थित रिंगिंग बेल कंपनी के एमडी मोहित गोयल, जीएम अनमोल गोयल, धारणा गर्ग, प्रेजिडेंट अशोक चड्ढा व सुमित के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।

अक्षय का आरोप था कि वह मोबाइल डिस्ट्रीब्यूशन का काम करते हैं। नवंबर माह में मोहित गोयल समेत अन्य आरोपी उनके ऑफिस में आए और समाचार पत्रों में छप रहे कंपनी के विज्ञापन दिखाकर कंपनी की सीएंडएफ व डिस्ट्रीब्यूटरशिप लेने का प्रस्ताव रखा।

उन्होंने कंपनी के 251 व 2999 रुपये वाले मोबाइल फोन भी दिखाए, साथ ही व्यापार करने पर तीन से 12 फीसद मुनाफे का दावा भी किया। उन्हें झांसे में लेने के लिए कंपनी अधिकारियों ने दिग्गज नेताओं के साथ अपने फोटो भी दिखाए।

आरोपियों ने यह भी कहा कि ये मोबाइल फोन डिजिटल इंडिया अभियान का हिस्सा है इसमें सरकार भी सहयोग कर रही है। इस पर ऑफिस में मौजूद अक्षय मल्होत्रा उनके पिता देवदत्त मल्होत्रा, मां निशा मल्होत्रा, अकाउंटेंट प्रेम झा व अरमान खान झांसे में आ गए और 25 दिसंबर को एग्रीमेंट साइन हो गया।

इसके बाद अक्षय ने रिंगिंग बेल कंपनी के खातों में कई किश्तों में 30 लाख रुपये जमा कराए गए। आरोप है कि एग्रीमेंट होने के बाद कंपनी द्वारा 13 लाख रुपये का माल भेजा गया जो कि किसी दूसरे डीलर के यहां से उठवा कर भिजवाया गया।

यह माल खराब होने के कारण कंपनी को वापस भेज दिया गया। अक्षय का आरोप है कि बाकी कीमत का माल कंपनी द्वारा नहीं भेजा गया संपर्क करने पर लगातार टालमटोल की जाती रही। कंपनी ने न तो मोबाइल फोन दिए और न ही पैसे वापस किए।

इसके बाद अक्षय ने कंपनी के पांच अधिकारियों को नामजद करते हुए बुधवार को रिपोर्ट दर्ज कराई। इसी तरह के अन्य पीडि़त भी थाने पहुंचे और करोड़ों की ठगी का आरोप लगाया। अब मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय द्वारा भी की जा सकती है।

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