लंगर और प्रसाद पर GST को लेकर पंजाब में राजनीति शुरू

पंजाब में लंगर और प्रसाद के GST के दायरे में आने पर अब राजनीति भी शुरू हो गई है. दरअसल अब तक लंगर और प्रसाद के लिए खरीदे जाने वाले कच्चे सामान पर किसी भी तरह का कोई वैट या अन्य टैक्स नहीं लगता था, लेकिन 1 जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद अब लंगर और प्रसाद बनाने के लिए खरीदे जाने वाले राशन और अन्य सामान पर जीएसटी लागू हो गया है. इसी वजह से अमृतसर के स्वर्ण मंदिर और सिखों के गुरुद्वारों का संचालन करने वाली संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अंदर आने वाले तमाम गुरुद्वारों में लंगर और प्रसाद बनाना महंगा हो गया है.

इसी बात को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने पंजाब और केंद्र सरकार से लंगर और प्रसाद बनाने के लिए खरीदे जाने वाले सामान को GST से छूट देने का निवेदन किया है. लेकिन अब तक सरकार की तरफ से इस छूट को लेकर कुछ भी साफ नहीं कहा गया है. इसी वजह से एसजीपीसी के प्रधान कृपाल सिंह बडूंगर ने कहा कि स्वर्ण मंदिर और अन्य गुरुद्वारों में 24 घंटे लंगर की सुविधा रहती है और बिना किसी धर्म-जाति के भेदभाव के वहां पर बिना कोई पैसे लिए हर आने वाले व्यक्ति को लंगर और प्रसाद दिया जाता है.

ऐसे में GST लगने से गुरुद्वारों के लिए लंगर चलाना बेहद मुश्किल हो गया है और गुरुद्वारे दान से मिली रकम से ही ये लंगर चलाते हैं ना कि किसी लाभ या फायदे के लिए लंगरों को चलाया जाता है. ऐसे में लंगरों के लिए खरीदे जाने वाले सामान को GST में राहत दी जानी चाहिए.

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने भी विभिन्न धार्मिक संस्थानों में दिए जाने वाले प्रसाद और लंगर जैसे सामुदायिक भोजनालय को जीएसटी से बाहर करने की मांग की है. मुख्यमंत्री ने सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और अन्य लोगों व संस्थानों की अपील पर केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर इन सामानों को वस्तु एवं सेवा कर से बाहर करने की मांग की है.

अमरिंदर ने अपने पत्र में जेटली को याद दिलाया है कि गुरुद्वारा को लंगर में भोजन देने के लिए वैट के भुगतान से छूट दी गई थी. लेकिन नई जीएसटी प्रणाली के तहत इस पर कर का भुगतान करना है और साथ ही प्रसाद ब्रिकी पर भी कर देना है. इस वजह से सभी धार्मिक संस्थानों मंदिर, गुरुद्वारा, मस्जिद और गिरजाघरों पर असर पड़ रहा है.

वहीं इस मुद्दे पर अकाली दल ने पंजाब सरकार को याद दिलाया कि जिस जीएसटी काउंसिल ने लंगर और प्रसाद के लिए खरीदे जाने वाले सामान को जीएसटी के दायरे में रखा है, उस जीएसटी काउंसिल के मेंबर पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल भी हैं तो क्यों नहीं उन्होंने उसी वक्त लंगर और प्रसाद के लिए खरीदी जाने वाली तमाम सामग्री को जीएसटी के दायरे से बाहर रखवाने की कोशिश नहीं की. साथ ही राज्य सरकारों के पास संस्थाओं को 66 प्रतिशत तक जीएसटी में छूट देने का अधिकार है तो क्यों नहीं पंजाब सरकार खुद ही पहल करती और एसजीपीसी को लंगर के लिए खरीदे जाने वाले सामान में 66 फीसदी जीएसटी की राहत देती. इसके बाद केंद्र सरकार से भी जीएसटी हटवाने की कोशिश की जानी चाहिए.

आम आदमी पार्टी ने भी गुरुद्वारों के लंगर के लिए खरीदे जाने वाली वस्तुओं और सामग्री को जीएसटी के दायरे से बाहर रखने की मांग की है. आम आदमी पार्टी के पंजाब के सीनियर लीडर सुखपाल खैहरा ने कहा कि धार्मिक संस्थानों के लंगर और खास तौर पर स्वर्ण मंदिर और अन्य गुरुद्वारों के अंदर बिना किसी भेदभाव के हर धर्म के व्यक्ति को खाना परोसा जाता है और ये लंगर कोई कमाई का जरिया नहीं है बल्कि धार्मिक श्रद्धा और सद्भाव का प्रतीक है. ऐसे में इन लंगरों को जीएसटी से राहत हर हाल में मिलनी चाहिए और पंजाब सरकार पहले अपने लेवल पर ही जीएसटी से राहत देने की कोशिश करे और उसके बाद केंद्र सरकार से भी राहत दिलवाने की कोशिश करे.

 

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