चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे पटियाला और अमृतसर के मेडिकल कॉलेजों में नियुक्‍त होंगे 400 डॉक्टर

अमृतसर

शिक्षकों एवं चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे अमृतसर व पटियाला सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 400 सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों की तैनाती की जाएगी. पंजाब सरकार द्वारा इन डॉक्टरों की नियुक्ति की प्रक्रिया सोमवार को संपन्न कर ली जाएगी. यदि ये 400 डॉक्टर इन दोनों मेडिकल कॉलेजों में ज्वाइन करते हैं तो निसंदेह इन कॉलेजों की कई समस्याएं खत्म हो जाएंगी.

दरअसल, मेडिकल शिक्षा एवं खोज विभाग अरसे से सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों की तैनाती के लिए प्रयास कर रहा है. पिछले वर्ष भी डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया संपन्न हुई थी, लेकिन स्टेशन अलॉटमेंट के बावजूद डॉक्टरों ज्वाइन नहीं किया। इसका सही कारण तो पता नहीं चल पाया लेकिन ये कहा जाता रहा है कि सरकारी सेवा में आने से डॉक्टर इसलिए कतरा रहे क्योंकि यहां उन्हें मरीजों के इलाज के साथ-साथ उन्हें कई मामलों में कानूनी पेचदगियों में उलझना और वीआईपी ड्यूटी का सामना करना पड़ता है. वहीं कई बार मरीज की मौत के बाद उसके परिजनों के गुस्से का शिकार होना पड़ता है.

बता दें कि दो वर्ष पूर्व मेडिकल शिक्षा एवं खोज विभाग ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित सिविल अस्पताल के 22 डॉक्टरों को सीनियर रेजीडेंट के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज भेजा था.

सरकारी आदेश के बाद ये डॉक्टर मेडिकल कॉलेज में ज्वाइन तो कर गए, लेकिन सिविल अस्पताल में मरीजों की हालत पतली होने लगी. इसके तकरीबन छह माह बाद सरकार ने सिविल अस्पताल में डॉक्टरों की तैनाती की थी, लेकिन डॉक्टरों की कम संख्या के कारण परेशानी बरकरार रही.

अब मेडिकल शिक्षा एवं खोज विभाग ने दोनों मेडिकल कॉलेजों में 200—200 सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों की तैनाती की प्रक्रिया शुरू की है. इन दोनों ही मेडिकल कॉलेजों में स्टाफ की भारी कमी है. अमृतसर मेडिकल कॉलेज को मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया ने 50 एमबीबीएस की सीटें प्रदान की है, लेकिन पंजाब सरकार स्टाफ पूरा नहीं कर पाई. लिहाजा मेडिकल कौंसिल ने कई बार कॉलेज को चेतावनी दी है कि स्टाफ पूरा न हुआ तो एमबीबीएस की बढ़ाई गईं सीटें वापस भी ली जा सकती हैं.

इन सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को जहां एमबीबीएस छात्रों की क्लास लेनी होगी, वहीं मेडिकल कॉलेज से संबंधित सरकारी अस्पतालों में मरीजों की तीमारदारी भी करनी होगी. नियमानुसार यदि 400 रेजिडेंस डॉक्टर नौकरी ज्वाइन कर लेते हैं तो तीन साल की सेवा अवधि पूरी करने के पश्चात वे असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के योग्य हो जाएंगे.

इसके पश्चात, विभाग द्वारा डीपीसी करने के बाद इन्हें अगले पांच साल बाद एसोसिएशन प्रोफेसर के रूप में पदस्थापित किया जाएगा और फिर अगले तीन साल बाद वे प्रोफेसर बना दिए जाएंगे. गुरुनानक देव अस्पताल के मेडिकल सुपङ्क्षरटेंडेंट डॉ. रामस्वरूप शर्मा का कहना है कि सोमवार को सारी प्रक्रिया पूरी होने के सात दिनों के भीतर ये डॉक्टर ड्यूटी ज्वाइन कर जाएंगे.

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