विकास कार्यो के लिए 500 करोड़ कर्ज लेगा हिमाचल

हिमाचल सरकार 500 करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है. वित्त विभाग की ओर से शुक्रवार को कर्ज लेने से संबंधित अधिसूचना जारी की गई है. कर्ज की रकम सरकार के खजाने में 12 जुलाई तक आएगी. इससे पहले सरकार इतनी ही राशि का कर्ज उठा चुकी है.

केंद्र सरकार की फटकार के बाद अब प्रदेश सरकार तय मानकों के तहत ही कर्ज उठा रही है.  मौजूदा वित्त वर्ष में सरकार तीन हजार करोड़ रुपये का कर्ज ले सकती है. कर्ज की तय सीमा के 50 फीसद के कुछ कम अर्थात करीब 1300 करोड़ का कर्ज उठा चुकी है. सरकार विकास कार्यों के नाम पर लगातार कर्ज ले रही है. यही वजह है कि कर्ज का बोझ 43 हजार करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है.

नया कर्ज 10 साल की अवधि के लिए लिया जा रहा है. जुलाई 2027 तक सरकार को ब्याज सहित लिया जा रहा कर्ज वापस लौटाना होगा. तर्क दिया जा रहा है कि यह कर्ज विकास कार्य को गति प्रदान करने के लिए लिया जा रहा है. प्रदेश सरकार को सालाना पेंशन व वेतन तथा भत्तों का भुगतान करने के लिए 13 हजार करोड़ रुपये की जरूरत होती है. पेंशन पर करीब 4400 करोड़ तथा वेतन व भत्तों पर करीब नौ हजार करोड़ रुपये खर्च होते हैं.

चार हजार करोड़ रुपये अन्य प्रतिबद्ध देनदारियों के भुगतान पर खर्च होते हैं. हर साल प्रतिबद्ध देनदारियों व वेतन व भत्तों के साथ पेंशन के भुगतान के लिए सरकार को 17 हजार करोड़ की रकम चाहिए.

हालांकि 14वें वित्तायोग से प्रदेश को राजस्व घाटा अनुदान के तौर पर 46625 करोड़ की रकम पांच साल में मिलनी है मगर केंद्र ने इस राशि को जारी करने के साथ राजस्व घाटा कम करने व वित्तीय अनुशासन को अपनाने की शर्त भी लगाई है. इस तरह वित्तीय अनुशासन को न अपनाने की स्थिति में सरकार को आने वाले वर्षों में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है

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