इस फॉर्मूले से कम होगी हरियाणा में डॉक्टर्स की कमी, जानिए

जिस तरह से हरियाणा का स्वास्थ्य विभाग डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है, वैसा ही हाल कर्नाटक का है। हाल ही में कर्नाटक सरकार की तरफ से डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए पहल करते हुए डॉक्टरों से पूछा गया है कि उन्हें कितनी तनख्वाह चाहिए। कर्नाटक सरकार की तरफ से कहा गया है कि एमबीबीएस डॉक्टर को एक लाख 10 हजार और विशेषज्ञ को एक लाख 30 हजार रुपये तनख्वाह देंगे। साथ ही अगर किसी डॉक्टर को ज्यादा तनख्वाह चाहिए, तो आवेदन के साथ अपनी मांग से अवगत करा दें, ताकि सरकार उसपर विचार कर सके।

यह अलग बात है कि हरियाणा में इस दिशा में अभी कोई पहल नहीं की गई है। दरअसल कर्नाटक जैसी समस्या पिछले कई वर्षों से हरियाणा में भी है। यहां डॉक्टरों की कई मांगें हैं। इनमें मुख्य मांग है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों को ज्वाइनिंग पर ही दिल्ली सरकार की तरह एसएमओ का पद दिया जाए और तनख्वाह भी उसी हिसाब से दी जाए। मांग पूरी नहीं होने के कारण आज हालात यह हैं कि प्रदेश में ढाई करोड़ जनसंख्या पर सरकारी अस्पतालों में 1300 डॉक्टर है और नए डॉक्टर आ नहीं रहे हैं।

हरियाणा में एमबीबीएस डॉक्टर को 65 हजार व विशेषज्ञ को ज्वाइनिंग पर 70 हजार तनख्वाह दी जाती है और मेडिकल आफिसर (एमओ) का पद देते हैं। प्रदेश में सीनियर मेडिकल आफिसर एसएमओ का पद करीब 14 से 15 वर्ष बाद दिया जाता है।

जिस डॉक्टर की 20 वर्ष की सर्विस पूरी हो जा रही है वो वीआरएस ले ले रहा है और नए डॉक्टर आ नहीं रहे हैं। सरकार में कोई सुनवाई नहीं है। अगर ऐसे चलता रहा, तो अस्पताल बिल्डिंग तो होगी, लेकिन डॉक्टर नहीं होंगे। क्योंकि हर महीने कोई न कोई डॉक्टर नौकरी छोड़ रहा है। अब हालात यह है कि हरियाणा में एमबीबीएस डॉक्टर भी ज्वाइन नहीं कर रहे। -डॉ. एमपी सिंह, उपाध्यक्ष, हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन।

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