चीन से जारी तनाव के बीच भारत करेगा US-जापान के साथ सैन्य अभ्यास

दिल्ली

चीन के साथ बढ़ रहे कूटनीतिक तनाव के बीच भारत, जापान और अमेरिका शुक्रवार से मालाबार सैन्य अभ्यास शुरू करने जा रहे हैं. जिस स्तर पर तीनों देश नौसैनिक अभ्यास करने जा रहे हैं, वैसा समूचे हिंद या प्रशांत महासागर क्षेत्र में आज तक नहीं हुआ है.

बंगाल की खाड़ी में 10 दिनों तक चलने वाले इस अभ्यास को लेकर चीन की भृकुटियां पहले से ही तनी हुई हैं. इस अभ्यास की गंभीरता का पता इस बात से लगाया जा सकता है कि तीनों देश अपने सबसे बड़े युद्धपोत इसके लिए भेज रहे हैं. दुनिया का सबसे बड़ा युद्धपोत अमेरिका का निमिट्ज (सीवीएन 68) बंगाल की खाड़ी में डेरा डाल चुका है.

अमेरिका इस युद्धाभ्यास के लिए गाइडेड मिसाइल क्रूजर यूएसएस प्रिंसटन (सीजी 59), गाइडेड मिसाइल विध्वंसक यूएसएस हावर्ड के अलावा अन्य कई बेहद शक्तिशाली युद्धपोत और सबसे प्रतिष्ठित पनडुब्बी लॉस एंजिल्स को भी भेज रहा है. हाल के वर्षो में किसी भी युद्धाभ्यास में अमेरिका की तरफ से भेजी गई यह सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों और नौसैनिकों की फौज है.

अमेरिका के अलावा जापान नौसेना के अग्रणी युद्धपोत इजुमो (जापान का सबसे बड़ा हेलीकॉप्टर वाहक जहाज) और जेएस साजानामी इसमें हिस्सा ले रहे हैं. भारत की अगुआई युद्धपोत आइएनएस विक्रमादित्य करेगा. कुल मिला कर इस इलाके में पहली बार तीन देशों के तकरीबन 15 विशालकाय युद्धपोत, दो पनडुब्बियां, दर्जनों युद्धक विमान और हेलीकॉप्टर व निगरानी करने वाले उपकरणों का सैन्य अभ्यास में इस्तेमाल होगा. कहने की जरूरत नहीं कि इससे चीन परेशान है और उसने कुछ ही दिन पहले हिंद महासागर में अपनी पनडुब्बी तैनात कर दी है.

अमेरिकी नौसेना की तरफ से दी गई सूचना के मुताबिक, इस बार मालाबार सैन्य अभ्यास जमीन और समुद्र दोनों जगहों पर होगा. इस बार पनडुब्बी युद्ध और इस हालात में बचने के उपायों पर खास तौर पर ध्यान दिया जाएगा. तीनों देशों की नौसेना अपने सर्वश्रेष्ठ तकनीक और अन्य जानकारी एक-दूसरे से साझा करेंगे. एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तीनों देशों की नौसेना के बीच पहले से काफी बेहतर रिश्ते हैं, जो इस युद्धाभ्यास से और मजबूत होंगे.

गौरतलब है कि पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच मालाबार सैन्य अभ्यास को लेकर विस्तृत चर्चा हुई थी.

मालाबार अभ्यास की शुरुआत भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय थी. लेकिन, वर्ष 2015 में इसमें जापान को शामिल किया गया. अब देखना है कि इस अभ्यास को लेकर चीन सरकार की क्या प्रतिक्रिया होती है. वर्ष 2007 में पहली बार भारत ने अमेरिका, जापान, सिंगापुर और आस्ट्रेलिया के साथ बंगाल की खाड़ी में मालाबार अभ्यास किया था. तब चीन ने इस पर बेहद कड़ी प्रतिक्रिया जताई थी और कई देशों के राजनयिकों को तलब कर अपनी नाराजगी का इजहार किया था.

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