भूटान बॉर्डर विवाद: चीन का दावा, ऐतिहासिक रूप से डोकलाम हमारा क्षेत्र

पेइचिंग

चीन ने सिक्कम सेक्टर के विवादित इलाके डोकलाम पर अपने दावे को मजबूत दिखाने के लिए एक बार फिर ‘अपने इतिहास’ का हवाला दिया है. डोकलाम पर भूटान के दावे को खारिज करते हुए चीन के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को विवादित इलाके में चीन के सैनिकों द्वारा किए जा रहे सड़क निर्माण कार्य का बचाव किया.

चीन और भारत के सैनिकों के बीच सीमा पर जारी गतिरोध को लेकर भारत द्वारा दी गई पहली प्रतिक्रिया के जवाब में चीन की सरकार ने फिर अपनी इस मांग को दोहराया है कि भारत को उस इलाके से अपने सैनिक वापस बुला लेने चाहिए.

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा, ‘हम कई बार जोर देकर कह चुके हैं कि डोकलाम चीन का है और इसे लेकर कोई विवाद नहीं है. जिस इलाके में सड़क बनाई जा रही है, वह पूरी तरह चीन की सीमा के अंदर आता है.’

लू ने आगे कहा, ‘डोकलाम इलाके का इस्तेमाल तिब्बत के लोग पारंपरिक चारागाह के रूप करते रहे हैं और हमने इस इलाके अच्छे से संभाला है. 1960 के दशक से पहले बॉर्डर पर रहने वाले भूटान के लोगों को यहां अपने मवेशी चराने के लिए चीन की इजाजत लेनी पड़ती थी.’

बता दें कि विवादित इलाकों पर अपना दावा जताने के लिए चीन हमेशा से ‘इतिहास के अपने संस्करण’ का सहारा लेता रहा है. चाहे बात अरुणाचल की हो, जापान के साथ सीमा विवाद की हो या साउथ चाइना सी इलाके की, चीन हमेशा से यही करता आया है.

गौरतलब है कि चीन और भूटान के बीच के विवादित क्षेत्र डोकलाम में चीन द्वारा सड़क निर्माण कार्य को भारतीय सैनिकों द्वारा अवरूद्ध किए जाने के बाद भारत और चीन के सैनिकों के बीच गतिरोध बना हुआ है. चीन के सैनिक जिस इलाके में सड़क बनाना चाह रहे थे, वह भूटान के साथ भारत के लिए कई सुरक्षा चिंताएं खड़ी करता है. उस इलाके से भारत के सिलिगुड़ी कॉरिडोर की दूरी काफी कम है, जो नॉर्थ ईस्ट को भारत के शेष इलाकों से जोड़ता है.

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