एअर इंडिया के विनिवेश को कैबिनेट की सैद्धांतिक मंजूरी, 52 हजार करोड़ का है कर्ज

दिल्ली

एयर इंडिया में निजी निवेश को बढ़ावा देने पर लंबे समय से विचार कर रही मोदी सरकार ने इसमें विनिवेश को मंजूरी दे दी है. पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार शाम को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई.

फाइनैंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने बताया, ‘विनिवेश के जरिए हमेशा संभावनाएं तलाशी जाती रही हैं. अब हमने इसी ओर कदम बढ़ाने का फैसला लिया है. कुछ संस्थाओं को निजीकरण की ओर बढ़ाया जा सकता है. ऐसे संस्थानों को हमने चिन्हित किया है.’

सरकारी क्षेत्र की एयर इंडिया देश की सबसे बड़ी घरेलू विमानन कंपनी है. एयर इंडिया 41 इंटरनैशनल और 72 घरेलू डेस्टिनेशंस के लिए उड़ान सेवाएं मुहैया कराती है. मार्केट के लिहाज से बात करें तो 17 फीसदी हिस्सेदारी के साथ यह देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी है. यही नहं घरेलू पैसेंजर मार्केट में भी कंपनी की हिस्सेदारी 14.6% है. हालांकि निजी कंपनियों के तेजी से विस्तार के चलते एयर इंडिया की हिस्सेदारी में लगातार गिरावट आ रही है.

जानकारों के मुताबिक एयर इंडिया पर करीब 52,000 करोड़ रुपये का कर्ज है. इसमें 21,000 करोड़ रुपये विमान संबंधी लोन है जबकि करीब 8,000 करोड़ रुपये वर्किंग कैपिटल है. इसमें से 30,000 करोड़ रुपये के कर्ज को नीति आयोग ने राइट ऑफ करने के लिए केंद्र सरकार से सिफारिश की है.

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