हरियाणा की नई परिवहन नीति पर संकट, HC जाएंगे निजी बस ऑपरेटर

रोडवेज कर्मचारियों के दबाव में नई परिवहन नीति बनाने जा रही हरियाणा सरकार के खिलाफ निजी बस ऑपरेटरों ने मोर्चा खोला दिया है. इससे नई परिवहन नीति पर अस्तित्व में आने से पहले ही संकट के बादल मंडराने लगे हैं.
नई नीति को आनन-फानन में सरकार लागू करती है तो ऑपरेटर इसे भी हाईकोर्ट में चुनौती देंगे. इसके संकेत द हरियाणा को-ऑपरेटिव ट्रांसपोर्ट सोसायटी वेलफेयर एसोसिएशन ने सोमवार को यहां दिए.
एसोसिएशन के प्रधान सुनील कुमार ने साफ कर दिया कि परिवहन नीति-2017 रद्द करने के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है. कोर्ट ने सरकार को नई नीति लागू होने तक पुरानी के तहत निजी बसें रूट परमिट पर चलने के आदेश दिए हैं, लेकिन सरकार उनकी अनुपालना नहीं करा रही. इसलिए अवमानना याचिका भी दायर की जाएगी.
निजी बस ऑपरेटरों को 2013 स्टेज कैरिज स्कीम के तहत बसें चलाने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि ये स्कीम पहले ही रद्द हो चुकी है. सरकार और परिवहन विभाग के अधिकारी रोडवेज कर्मियों के दबाव में काम कर रहे हैं.

पुरानी नीति के तहत आवंटित रूट पर संचालित बसों को आरटीए और रोडवेज महाप्रबंधकों के जरिए रोका जा रहा है. उन्होंने कहा कि परिवहन मंत्री के निर्देश लिखित नहीं, जबकि मौखिक हैं, इसके बावजूद परिवहन विभाग के अधिकारी हाईकोर्ट के आदेशों की अवमानना कर रहे हैं.

सुनील कुमार ने कहा कि रोडवेज यूनियनें प्रदेश में परिवहन माफिया को बढ़ावा देने की फिराक में हैं. वे निजी बसों को बंद कराकर लगभग दस हजार मैक्सी कैब को उनके रूट पर चलाना चाहती हैं.
Share With:
Rate This Article