2010-2016 के बीच 1,309 किसानों ने की आत्महत्या: पंजाब यूनिवर्सिटी

किसानों की आत्महत्या देश के कई राज्यों में सरकारों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है लेकिन पंजाब के इन सात जिलों में किसानों की आत्महत्या के मामलों में पिछले डेढ़ दशक में तिगुई बढ़ोतरी हुई है। पंजाब यूनिवर्सिटी के सर्वे में इस बात हुई पुष्टि हुई है। सर्वे में बताया गया है कि फरीदकोट, फतेहगढ़ साहिब, होशियारपुर, पटियाला, रूपनगर, एसएएस नगर और श्री मुक्तसर साहिब में 2010 से 2016 के बीच 1309 किसानों ने खुदकुशी की।

इससे पहले साल 2000 से 2011 के बीच यह आंकड़ा 365 था। जिनमें से 211 किसान थे और 154, कृषि मजदूर थे। जबकि इन साल जिलों में भटिंडा, मानसा और संगरूर जिलों का नाम शामिल नहीं है। इससे पहले साल 2015 में बीजेपी और अकालीदल वाली गठबंधन सरकार ने पंजाब के 22 जिलों को लेकर एक सर्वे करवाया था।

तीन विश्वविद्यालय, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (लुधियाना), गुरु नानक देव विश्वविद्यालय (अमृतसर) और पंजाबी विश्वविद्यालय (पटियाला) को किसान आत्महत्याओं की सीमा और कारणों का आकलन करने का काम सौंपा गया था। पंजाब विश्वविद्यालय की इस रिपोर्ट को पिछले महीने नई सरकार के सामने रखा गया था।

इस सर्वेक्षण के अनुसार, इन सात जिलों में अप्रैल 2010 से मार्च 2013 तक, आत्महत्या के 737 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से 340 आत्महत्याएं किसानों की थीं, और 397 कृषि श्रमिकों के थे। 1 अप्रैल, 2013 से दिसंबर 2016 तक इन सात जिलों में आत्महत्या के 572 मामले सामने आए, जिनमें से 230 किसान थे और 342, कृषि मजदूर थे।

सर्वे के अनुसार आत्महत्या का प्रमुख कारण किसानों में कर्ज के कारण बढ़ा तनाव था। सर्वेक्षण में साफ़ कहा गया है कि ‘कृषि पर बढ़ती लागत और उत्पादन की कीमतों में कोई बढ़िया वृद्धि न होने से यह गंभीर संकट पैदा हुआ है।

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