ऑस्ट्रेलियाई कंपनी करेगी प्रदूषण कम करने का काम, पराली से बनेंगे हार्डबोर्ड

एनसीआर और आसपास प्रदूषण का एक बड़ा कारण पराली की समस्या से निपटने का नया रास्ता बनता दिखाई दे रहा है। एक ऑस्ट्रेलियाई कंपनी ने पराली से हार्डबोर्ड बनाने में हरियाणा सरकार के साथ मिलकर काम करने की दिलचस्पी दिखाई है।

ऑस्ट्रेलिया की एमपैन पराली से हार्डबोर्ड बनाती है। हरियाणा के कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनकड़ ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर गए थे। मंत्री ने कंपनी के अधिकारियों के साथ इस सिलसिले में बात की। अधिकारियों को बताया गया कि हरियाणा में भारी मात्रा में पराली है और इसका सदुपयोग हो सकता है। इस पर कंपनी ने हार्डबोर्ड बनाने में रुचि दिखाई है।

कृषि मंत्री के अनुसार कंपनी धान की पराली के प्रबंधन के लिए हरियाणा में काम करना चाहती है। उन्होंने बताया कि इस सिलसिले में कंपनी के प्रतिनिधि जॉन गौरमैन हरियाणा के कैथल जिले का दौरा भी कर चुके हैं।

बैठक में कृषि मंत्री ने बताया कि हरियाणा में 90 लाख एकड़ में धान की खेती होती है। करनाल क्षेत्र धान का कटोरा कहलाता है। ऐसे में पराली से हार्डबोर्ड बनाने वाली कंपनी अगर यहां काम करती है तो यह प्रदेश के लिए बेहतर रहेगा। बैठक में ऑस्ट्रेलियाई उद्योगपतियों, विशेषकर ऐमपैन कंपनी ने अपने इस प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी भी दी।

एसोचौम ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष यतींद्र गुप्ता व भारतीय दूतावास के काउंसिल जनरल बी. वनलालवाना की पहल पर आस्ट्रेलिया से भारत में काम करने के इच्छुक आस्ट्रेलियाई उद्योगपति व भारतीय मूल के उद्योगपतियों के साथ यह बैठक हुई।

कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने बताया कि वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर बृजेश के. सिंह ने हरियाणा में एक्सीलेंस सेंटर खोलने की बात कही है। द यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी में हरियाणा मूल के डॉक्टर मेहर खटकड़ ने जेनेटिक्स के माध्यम से हरियाणा में मिल्क प्रॉडक्शन बढ़ाने में सहयोग करने का आश्वासन दिया। बैठक के बाद धनखड़ ने बताया कि उद्योगपतियों के साथ हुई यह बैठक काफी उपयोगी रही और आने वाले समय में हरियाणा को इसका फायदा मिलेगा।

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