दार्जिलिंग में बेकाबू हुआ GJM का आंदोलन, ममता सरकार ने बुलाई सेना

दार्जिलिंग

राज्य मंत्रिमंडल की बैठक स्थल पर जाने की कोशिश कर रहे गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के समर्थकों की गुरुवार को पुलिस से झड़प हुई. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिये लाठी चार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े.

पुलिस सूत्रों ने कहा कि जीजेएम समर्थकों ने पुलिस द्वारा लगाये गये बैरीकेडों को तोड़ने की कोशिश की और पथराव किया. उन्होंने पुलिस की कुछ गाड़ियों को नुकसान भी पहुंचाया. इस दौरान कुछ पुलिसकर्मियों को चोट भी आई. प्रदर्शनकारी ‘‘स्कूलों में बंगाली भाषा को थोपे जाने’’ समेत कई मुद्दों को लेकर विरोध कर रहे थे.

गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के नेता विमल गुरुंग ने कहा कि लड़ाई जाति की आजादी और भाषा बचाने की लड़ाई है. इसमें वह अकेले नहीं बल्कि पूरे गोरखा जाति के लोग शामिल हैं. अन्य लोगों को भी विकास बोर्ड से आकर लड़ाई का समर्थन करना चाहिए. अगर पुलिस प्रशासन सरकार का साथ न दे तृणमूल कांग्रेस का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हिटलर शासन चला रही है. वह बंगाली भाषा का नहीं बल्कि नीति का विरोध कर रहे हैं.

हजारों आंदोलनकारियों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन को सेना बुलानी पड़ गई. यह हिंसा भानु भवन के पास भड़की, जहां जीजेएम के समर्थकों ने गोरखाओं के लिए एक अलग राज्य की मांग के लिए दबाव बनाने हेतु रैली का आयोजन किया था.

खास बात ये है कि जहां ये हिंसा भड़की वहां से मात्र 500 मीटर की दूर पर सीएम ममता बनर्जी अपने दो दर्जन मंत्रियों के साथ कैबिनेट मीटिंग कर रहीं थी. ममता बनर्जी ने 45 साल के बाद दार्जिलिंग में पहली बार कैबिनेट की बैठक की है.

घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने स्थानीय चैनलों का प्रसारण बंद कर दिया है. इधर गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने बंगाली भाषा की पढ़ाई अनिवार्य करने के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी है. सीएम ममता बनर्जी ने भी हालात को देखते हुए एक मीटिंग बुलाई है.

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