सुषमा का PAK को दो टूक- ‘आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते’

दिल्ली

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा है कि पाकिस्तान भले ही दावा करे लेकिन सच तो यह है कि कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में नहीं ले जाया जा सकता. शिमला और लाहौर समझौते में इस बारे में बहुत साफ-साफ कहा गया है.

उन्होंने कहा कि भारत ने पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों को तीन स्तंभ के आधार पर तैयार किया है.

पहला- हम सभी मसलों को वार्ता के माध्यम से हल करना चाहते हैं.

दूसरा- इन मसलों में किसी तरह की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की जा सकती.

तीसरा-आतंक और वार्ता एकसाथ नहीं चल सकते.

सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप के पेरिस समझौते से बाहर होने पर सुषमा ने कहा कि ट्रंप के आने के बाद भारत-अमेरिका के रिश्ते में कोई बदलाव नहीं आया है. पीएम मोदी ने ट्रंप से तीन बार बात की है. वित्त मंत्री जेटली ने वहां का एक सफल दौरा किया है.

एच1बी वीजा के मामले में सुषमा स्वराज ने कहा कि अभी तक तो इसमें तो कोई बदलाव नहीं आया है, लेकिन यह चिंता की बात है. पहले कोई कानून तो बने. मैं भरोसा देती हूं कि हम इस मामले में ट्रंप प्रशासन के साथ संपर्क में हैं. प्रधानमंत्री मोदी इस मसले को उठाएंगे.

उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका रिश्ते पारस्परिक फायदे पर आधारित हैं. अमेरिका के साथ हमारी सामरिक साझेदारी काफी मजबूत है. भारत ने पेरिस समझौते पर दस्तखत किसी दबाव में नहीं किया है. हमने ऐसा इसलिए किया है क्योंकि प्रकृति मां के साथ हमारा जुड़ाव है.

सुषमा स्वराज ने कहा कि पिछले 6 साल (यूपीए के 3 साल और एनडीए के 3 साल) में एफडीआई में 37.5 फीसदी की जबर्दस्त बढ़त हुई है. भारत का महत्व दुनिया भर में बढ़ रहा है. एनआरआई का मनोबल काफी बढ़ा हुआ है. विदेश में जब भी कोई विदेशी मुसीबत में होता है, तो उसे यह भरोसा होता है कि हम उनके साथ रहेंगे. भारतीयों की सुरक्षा विदेश मंत्रालय की सर्वोच्च प्राथमिकता है.

उन्होंने कहा कि विदेश में मुसीबत में फंसे करीब 80,000 भारतीयों को भारत लाया गया है. उन्होंने कहा कि पासपोर्ट सेवा में सुधार किया गया है और उसका विस्तार भी किया गया है.

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