हरियाणा ने सिल्क उत्पादन की तरफ बढ़ाया कदम

अब दुनिया चायना या देश के दूसरे राज्यों के साथ-साथ हरियाणा के सिल्क को भी अपने पहनावे का हिस्सा बनाएगी। देशभर का पेट भरने वाला हरियाणा अब पूरी तरह नए प्रयोग, रेशम उत्पादन की तरफ कदम बढ़ाने की तैयारी में है। इसके लिए वैज्ञानिकों की पड़ताल शुरु हो चुकी है और शुरुआती अनुमान किसानों के लिए नई राह खोलते दिखाई दे रहे हैं।

रेशम का कीड़ा केवल किसानों की माली हालत को सुधारने में ही नहीं बल्कि प्रदेश के लगातार बिगड़ रहे पर्यावरण को सुधारने में बहुत बड़ा मददगार होगा। रेशम की खेती एेसी जमीन पर होगी जिनका इस्तेमाल अमुमनन खेती के लिए नहीं होता है। यानि प्रदेश की बेकार पड़ी जमीन भी नई फसल से लहलहाएगी।

उत्तरी हरियाणा के तीन जिले पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर रेशम के उत्पादन के लिए सबसे मुनासिब जगह माने गए हैं। शिवालिक की तलहटी के आसपास बसे इन जिलों की जलवायु, मिट्टी और वातावरण को लेकर शुरु हुई शुरुआती स्टडी ने हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के एचएआरएसएसी (हरसक) के वैज्ञानिकों का हौंसला बढ़ा दिया है और वे अगले डेढ़ साल तक इसपर काम करेंगे।

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