मानेसर लैंड रिलीज में आईपीएस नवदीप विर्क के खिलाफ अर्जी खारिज

मानेसर लैंड रिलीज मामले गुरु ग्राम के एडिशनल चीफ मजिस्ट्रेट प्रशांत राणा ने पंचकूला निवासी रविंद्र कुमार की उस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने तत्कालीन पुलिस कमिश्नर नवदीप सिंह विर्क पर तथ्य छिपाकर मामला जांच के लिए सीबीआई को दिए जाने की सिफारिश की थी.
इससे पहले कांग्रेस के करीब 12 विधायकों ने भी कुछ दिन पहले ही गृह विभाग के पूर्व सचिव के पत्र और एक अखबार में छपी खबर के हवाले से विर्क के साथ-साथ सरकार पर भी तथ्य छिपाकर मानेसर मामले की सीबीआई जांच कराए जाने के आरोप लगाए थे. मानेसर लैंड रिलीज मामले में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा सीबीआई जांच का सामना कर रहे हैं.
कोर्ट ने माना है कि खुद को आरटीआई एक्टिविस्ट बताने वाले पंचकूला निवासी रविंद्र कुमार का इस मामले से सीधा कोई लेना-देना नहीं है. क्योंकि न तो वह इस मामले में कहीं अभियुक्त है और न ही उसकी मानेसर में कहीं जमीन है. बल्कि पॉलिटिकली मोटिवेटेड होकर उसने केवल एक पुलिस अफसर को बदनाम करने के इरादे से यह अर्जी लगाई है.
उन्हें यह अच्छी तरह से मालूम है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है. सुप्रीम कोर्ट इसमें सीबीआई को 4 महीने में जांच पूरी करने के आदेश दे चुकी है, बल्कि 12 अप्रैल, 2017 को अपना आदेश भी रिजर्व कर चुकी है. कोर्ट ने यह भी माना है कि रविंद्र कुमार की अर्जी आरटीआई एक्ट और कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग का अच्छा उदाहरण है.
उसने खुद को सोशल वर्कर बताते हुए सिस्टम में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने की बात कही है, लेकिन अन्य जिलों और अदालतों में इस तरह के हजारों केस चल रहे हैं, लेकिन उसने केवल इस एक ही प्रकरण को चुना है. यह रविंद्र कुमार वही है, जिसने पिछले दिनों वरिष्ठ आईएएस डॉ. अशोक खेमका के खिलाफ भी कई शिकायतें दर्ज कराई थीं.
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