छोटा लेकिन दमदार रोल, ‘बेवॉच’ में छाईं देसी गर्ल प्रियंका, पढ़ें रिव्यू

90 के दशक में जब ‘बेवॉच’ सीरियल आया करता था तो उसे देखने की चाह एक खास तरीके के भारतीय दर्शक की भी होती थी. डेविड और पामेला की मौजूदगी उस सीरियल की जान हुआ करती थी जिसे देखते-देखते 90 के दशक के बच्चे अब बड़े हो चुके हैं. अब लगभग 16 साल बाद उसी सीरियल की थीम पर फिल्म ‘बेवॉच’ बनाई गई है.

कहानी
यह कहानी फ्लोरिडा के समंदर के किनारे बेवॉच टीम की है जिसके मुखिया मिच (ड्वेन जान्सन) हैं. एक बार सिटी काउंसिल ने मिच के टीम में मैट ब्राडी (जैक एफ्रान) की नियुक्ति की जिससे मिच ना खुश थे क्योंकि मैट अपने काम में लापरवाही बरतते आए हैं. लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब बीच के पास ड्रग्स के बैग्स पाए जाते हैं और मिच के शक की सुई विक्टोरिया लीड्स (प्रियंका चोपड़ा) के ऊपर जाकर रुक जाती है. अब किस तरह से मिच और उसकी पूरी टीम इस षड्यंत्र का पर्दाफाश करती है यही इस फिल्म में दिखाया गया है.

कमजोर कड़ियां
– फिल्म की कहानी काफी घिसी-पिटी है जोकि हर एक फ्रेम में गेस की जा सकती है जिस से काफी बेहतर किया जा सकता था.
– मेकर्स को पता है कि बेवॉच सीरियल अपने समय का सुपर हिट शो हुआ करता था और कभी भी अगर उसके ऊपर फिल्म बनाई जाए तो उसका बेहतर होना बहुत जरूरी है जोकि यह फिल्म कर पाने में नाकामयाब रही है.
– फिल्म में एक्टर्स तो बहुत अच्छे हैं लेकिन कभी-कभी होता है कि आपके पास एक से बढ़कर एक खिलाड़ी हो लेकिन स्क्रिप्ट की वजह से स्कोर काफी कम रह पाता है. कुछ ऐसा ही इस फिल्म के साथ भी है. उम्दा स्टारकास्ट होने के बावजूद कहानी मात खा गई.
– कुछ सीक्वेंस ऐसे भी आते हैं जिन्हें देखकर लगता है कि शायद जबरदस्ती उन्हें रखा गया है.
– अंग्रेजी फिल्मों के फैंस जो इस फिल्म से बहुत कुछ एक्सपेक्ट कर रहे थे दुर्भाग्यवश उन्हें वह सब कुछ नहीं मिल पाएगा.

क्यों देख सकते हैं ये फिल्म
फिल्म मैं आपके पसंदीदा एक्टर जैसे ड्वेन जॉनसन, प्रियंका चोपड़ा, जैक एफ्रॉन की मौजूदगी फिल्म को काफी रिच बनाती है. साथ ही एक्शन सीक्वेंस और कुछ चुनिंदा सीन दिलचस्प है जो कि एक विजुअल ट्रीट का काम करते हैं.

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