वित्त वर्ष 2016-17 में बड़ी गिरावट के साथ आर्थिक विकास दर 7.1 प्रतिशत रही

दिल्ली

देश की आर्थिक विकास दर यानी जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े आ गए हैं. वित्त वर्ष 2016-2017 में देश की आर्थिक विकास दर 7.1 फीसदी रही है, जबकि 2015-16 में विकास दर 8 फीसदी थी.

वहीं, जनवरी-मार्च 2017 के दौरान विकास दर गिरकर 5.6 फीसदी हो गई, जबकि जनवरी-मार्च 2016 में विकास दर 8.7 फीसदी थी. 2016-17 में विकास दर के आंकड़ों से साफ है कि देश की आर्थिक विकास दर पर नोटबंदी का असर हुआ है. इसके अलावा, वित्त वर्ष 2017 की चौथी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 6.1 फीसदी रही है.

विश्लेषकों का मानना है कि पिछले साल हुई नोटबंदी के चलते जीडीपी और इकॉनमी के अहम सेक्टर्स में यह गिरावट आई है. 2015-16 की तुलना में यह .8 पर्सेंट की गिरावट है, बीते साल यह आंकड़ा 7.9 पर्सेंट था. 8 कोर सेक्टर्स की ग्रोथ भी अप्रैल महीने में बीते साल की तुलना में 8.7 पर्सेंट के मुकाबले 2.5 फीसदी पर आकर ठहर गई है.

नोटबंदी के अलावा 8 कोर सेक्टर्स में अप्रैल महीने में आई गिरावट की बड़ी वजह कोयला, क्रूड ऑइल और सीमेंट के उत्पादन में कमी भी है. पिछले साल अप्रैल में 8 इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टरों- कोयला, क्रूड ऑइल, नैचरल गैस, रिफाइनरी प्रॉडक्ट्स, फर्टिलाइजर, स्टील, सीमेंट और बिजली, की ग्रोथ रेट 8.7 फीसदी थी. लेकिन इस साल यह सिमट कर महज 2.5 फीसदी तक आ गई.

सबसे तेज गिरावट कंस्ट्रक्शन सेक्टर की ग्रोथ में देखने को मिली है. बीते साल इस सेक्टर की ग्रोथ का आंकड़ा 6 फीसदी था, जबकि इस साल -3.7 पर्सेंट की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. वहीं, मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ 5.1 फीसदी रही है. इस तरह कहा जा सकता है कि नोटबंदी के चलते विकास दर में यह बड़ी गिरावट आई है. यही नहीं बड़े पैमाने पर रोजगार देने वाले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ भी 12.7 पर्सेंट से कम होकर 5.3 पर्सेंट पर आकर सिमट आ गई है.

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