…तो क्या नियमित नहीं हो पाएंगे आउटसोर्स कर्मी

आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण में कानूनी पेच नहीं सुलझ रहा है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद नियमितीकरण पॉलिसी कानूनी अड़चनों के चलते लटक गई है। इस संबंध में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का कहना है कि आउटसोर्स कर्मियों के लिए सरकार पॉलिसी बनाते हुए तकनीकी पहलुओं को देख रही है।

इसके चलते देरी हो रही है। मुख्यमंत्री ने फरवरी माह में इसकी घोषणा की थी कि सरकार एक माह में नीति लेकर आएगी। अब मामला कानूनी पचड़ों में घिरने से सरकार के गले की फांस बनता दिख रहा है। विधानसभा चुनाव के लिहाज से आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने की नीति बेहद अहम है।

सूत्रों की माने तो सरकार आउटसोर्सिंग को पहले संविदा कर्मचारियों में परिवर्तित कर उनके नियमितीकरण का रास्ता खोलना चाहती है। इसका लाभ देने के लिए आउटसोर्सिंग पर तैनात कर्मचारी के कार्यकाल की न्यूनतम समय अवधि तय होनी है।

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