शहीद पति की कब्र पर पहुंची 93 साल की पत्नी, कहा- PAK को सबक सिखाओ

अमृतसर

1965 की जंग में पाकिस्तानी टैंकों को धूल चटाने वाले शहीद वीर अब्दुल हमीद की 93 वर्षीय पत्नी रसूलन आसल उताड़ में उनकी कब्र पर चादर चढ़ाने के लिए रविवार को अमृतसर पहुंचीं.

उनका कहना है कि अब शायद सांसें साथ न दें इसलिए आखिरी बार चादर चढ़ा कर उनको सजदा करने आई हैं. अमृतसर रेलवे स्टेशन पर उतरते ही इस बुजुर्ग महिला का गुस्सा पाकिस्तान के प्रति और भी बढ़ गया.

तल्ख तेवर में बीबी रसूलन अपनी सरकार से गुहार लगाई कि अब बातों से काम नहीं चलने वाला, पाक को उसी की भाषा में जवाब देना होगा.

हावड़ा-अमृतसर एक्सप्रेस ट्रेन से पोते जमील आलम के साथ पहुंची बीबी रसूलन के स्वागत के लिए 15 इंफेंट्री डिवीजन के अधिकारी-जवान, गांव आसल उताड़ के लोग पहुंचे हुए थे.

वह 22 मई को शहीद की मजार पर चादर चढ़ाएंगी, जहां उनको सम्मानित भी किया जाएगा.

बता दें कि उत्तर प्रदेश के जिला गाजीपुर के गांव धरमपुर में मुस्लिम दर्जी परिवार में पैदा हुए हमीद 1954 में ग्रेनेडियर्स इन्फैन्ट्री रेजिमेंट में शामिल हुए थे. जम्मू कश्मीर में बहादुरी दिखाने के चलते उनको पदोन्नत करके लांस नायक बना दिया गया.

1962 में चीन के साथ हुई जंग में भी उन्होंने अपना पराक्रम दिखाया. इसके बाद जब 1965 में पाकिस्तान ने भारत पर आक्रमण किया तो उन्होंने खेमकरण सेक्टर के आसल उताड़ इलाके में पाक सेना को टैंकों के साथ आगे बढ़ते देखा तो अपने प्राणों की चिंता न करते हुए अब्दुल हमीद ने अपनी तोप युक्त जीप को टीले के समीप खड़ा किया और गोले बरसाते हुए शत्रु के तीन टैंक ध्वस्त कर डाले. चौथी टैंक पर निशाना लगाते हुए 10 सितंबर को वह दुश्मन की गोलाबारी में शहीद हो गए.

मरणोपरांत उनको महावीर और सबसे बड़े सैनिक सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया. इसके अतिरिक्त भी उनको समर सेवा पदक, सैन्य सेवा पदक और रक्षा पदक प्रदान किये गए.

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