कश्मीर मुद्दे के चलते चीन की ‘वन बेल्ट वन रोड’ समिट में हिस्सा नहीं लेगा भारत

दिल्ली

सोमवार से शुरू होने जा रहे चीन के ‘वन बेल्‍ट वन रोड’ सम्‍मेलन में भारत के शामिल होने की संभावना नहीं है. इस बात की पुष्टि कुछ अधिकारिक सूत्रों ने की है.

जानकारी के मुताबिक भारत इस सम्‍मेलन में अपने किसी भी प्रतिनिधि को उसमें हिस्‍सा लेने के लिए नहीं भेजेगा. यानी कि चीन के अन्‍य देशों के साथ मिलकर पोर्ट, रेलवे और सड़क के संपर्क विकसित करने की महत्‍वाकांक्षी योजना का पूरी तरह से बहिष्‍कार करने का फैसला भारत ने कर लिया है.

बता दें कि इस प्रोजेक्‍ट का एक हिस्‍सा पाक अधिकृत कश्‍मीर (पीओके) से होकर गुजरता है. इसे चीन और पाकिस्‍तान के बीच (सीपीईसी) भी कहा जाता है. भारत शुरू से इसका विरोध करता रहा है क्‍योंकि उसका मानना है कि पीओके पाकिस्‍तान का नहीं बल्कि भारत का हिस्‍सा है.

वहीं, इस फोरम के शुरू होने में अब 48 घंटे का ही समय रह गया है पर विदेश मंत्रालय ने शनिवार को इस बारे में किसी भी प्रकार की कोई आधिकारिक टिप्‍पणी नहीं की. भारत के इस सम्‍मेलन में बहिष्‍कार की बात उस वक्‍त उभर कर आई है जब एक दिन पहले ही शुक्रवार को नेपाल ने भी फोरम में शिरकत करने के लिए हामी भर दी.

श्रीलंका और पाकिस्‍तान पहले से ही इसमें हिस्‍सा लेने के लिए तैयार हैं. वहीं अमेरिका ने इस मुद्दे पर भारत का साथ नहीं दिया है और यू-टर्न लेते हुए इस सम्‍मेलन में शामिल होने पर सहमति दे दी है.

वहीं, दूसरी तरफ एशिया को यूरोप से जोड़ने वाली चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की महत्वाकांक्षी ‘वन बेल्ट वन रोड’ पहल में शामिल होने के लिए नेपाल ने शुक्रवार को चीन के साथ करार पर हस्ताक्षर कर दिए हैं.

नेपाल का यह कदम भी भारत के लिए चिंता पैदा कर सकता है. बीजिंग में 14 और 15 मई को होने वाली ‘वन बेल्ट वन रोड’ (ओबीओआर) फोरम से पहले समझौते पर दस्तखत किए गए हैं. चीन ने पिछले साल के आखिर में नेपाल को ओबीओआर पर मसौदा प्रस्ताव भेजा था. इसके बाद महीने भर लंबे परामर्श के बाद नेपाली पक्ष ने कुछ बदलावों के साथ बीजिंग को मसौदा वापस भेज दिया था.

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