नक्सली समस्या का समाधान सिर्फ गोली से संभव नहीं, कारगर उपाय होने चाहिए- राजनाथ सिंह

सुकमा में नक्सली हमले में अर्धसैनिक बलों के 25 जवानों के मारे जाने की घटना के दो सप्ताह बाद आज गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आज नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि हम जवानों की शहादत को बर्बाद नहीं होने देंगे। कहा कि अब वो दिन दूर नहीं है, जब हिंसा से छुटकारा मिल सकेगा।

नक्सल समस्या से प्रभावित 10 राज्यों के साथ वामपंथी चरमपंथ के विभिन्न पहलुओं को संयुक्त रूप से समझने के लिए इस बैठक को बुलाया गया है, ताकि वामपंथी चरमपंथवाद पूर्ण बल और क्षमता से सामना किया जा सके। सुरक्षा की एक एकीकृत रणनीति पर चर्चा और काम करने के लिए और 35 बुरी तरह प्रभावित जिलों में विकास के लिए प्रोत्साहन देकर, एलडब्ल्यूई प्रभाव का सफाया किया जा सकता है।

केंद्रीय गृहमंत्री की ओर से नक्सली संगठनों के खिलाफ एक रणनीति के तहत शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लांग टर्म कार्ययोजना चलाए जाने की बात कही, साथ ही इन संगठनों के वित्तीय स्रोतों को बंद करने को लेकर कदम उठाने की प्रतिबद्धता जाहिर की। नक्सली समूहों पर हमले को लेकर सेटेलाइट आधारित तकनीक, आईटी और संचार के उचित उपयोग की बात दोहरायी। एंटी नक्सल आपरेशन के दौरान यूएवी, पीटीजेड कैमरा, जीपीएस, थर्मल इमेज, रडार और सैटेलाइट के उपयोग की बात कही। वामपंथी और नक्सली संगठनों से जुड़े प्रमुख लक्ष्यों को ट्रैक करने के लिए खुफिया अधिकारी नियुक्त करने की बात कही।

राजनाथ सिंह ने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि सुरक्षा बलों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएं। सुरक्षा बलों के आवासीय कैंपों में बिजली, पानी और संचार सुविधाओं को बढ़ाने का जिक्र किया। राजनाथ सिंह ने सुरक्षा बलों के प्रेरणा और प्रशिक्षण के मुद्दे पर जोर देते हुए कहा कि सेना के प्रशिक्षण और उनके कैंपों की सुविधाओं में इजाफा किये जाने की आवश्यकता है।

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