यादव सिंह को बचाने के लिए अखिलेश सरकार ने खर्च किए थे 21 लाख रुपए

नोएडा

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे नोएडा के पूर्व मुख्य इंजीनियर यादव सिंह को सीबीआई जांच से बचाने के लिए 21.15 लाख रुपये खर्च किए थे. अखिलेश यादव सरकार ने ये पैसे सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकीलों की फीस के रूप में दिए.

समाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर द्वारा आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना से मिली जानकारी के अनुसार, अखिलेश यादव सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील कपिल सिब्बल को 8.80 लाख रुपये, हरीश साल्वे को पांच लाख रुपये, राकेश द्विवेदी को 4.05 लाख रुपये और दिनेश द्विवेदी को 3.30 लाख रुपये दिए गए थे. नूतन ठाकुर की याचिका पर ही हाई कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी.

यादव सिंह को सीबीआई ने फरवरी 2016 में ठेके देने में पद का दुरुपयोग करके सरकार को चूना लगाने और घूस लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कालेधन को सफेद करने के मामले में यादव सिंह की 19.92 करोड़ रुपये की संपत्ति को जब्त कर लिया था. सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में इस मामले में याचिका दायर की थी. हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने यादव सिंह के मामले को सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया था.

उत्तर प्रदेश सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार की अपील 16 जुलाई 2015 को पहली सुनवाई में निरस्त हो गयी थी. अगस्त 2015 को सीबीआई ने 954.38 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के संबंध में यादव सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी.

सीबीआई ने यादव सिंह के दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा स्थित 12 ठिकानों पर छापा मारा था. यादव सिंह पर नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे के ठेकों में धांधली का आरोप है. सीबीआई ने यादव सिंह के ठिकानों से दस्तावेज, फाइलें, लैपटॉप, आईपैड और कम्प्यूटर जब्त किए थे. इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने यादव सिंह और उनके परिजनों के खिलाफ भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के दो अलग-अलग मामले दर्ज किए थे.

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