‘मन की बात’ में बोले पीएम मोदी- VIP कल्चर के बजाए देश में EPI परंपरा शुरू हो

दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को रेडियो के जरिए 31वीं बार ‘मन की बात’ की. उन्होंने देश को संबोधित करते हुए कहा, मन की बात में विविधताओं से भरी हुई जानकारियां मिलती हैं. मन की बात पर आये सुझाओं पर सरकार अध्ययन करती है. देश के हर कोने में शक्तियों का अम्बार पड़ा है.

मोदी ने कहा, मैं सबसे पहले तो अधिकतम सुझाव जो कि कर्मयोगियों के हैं, समाज के लिए कुछ न कुछ कर गुजरने वाले लोगों के हैं. मैं उनके प्रति आभार व्‍यक्‍त करता हूं. मोदी ने कहा, ये चीजें जब ध्यान में आयी तो मुझे लगा कि ये सुझाव सामान्य नहीं हैं, ये अनुभव के निचोड़ से निकले हुए हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, कई युवा कंफर्ट जोन में ही रहना चाहते हैं. लेकिन मैं गर्मियों की छुट्टी में जाने वाले युवाओं को तीन सुझाव देना चाहता हूं. पहला तो नई जगह घूमने जाएं, नये हुनर सीखें और बिना रिजर्वेशन की ट्रेन यात्रा करें.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीआईपी कल्चर के बारे में मन की बात में चर्चा करते हुए कहा, देश में वीआईपी की जगह इपीआई (EPI) Every Person Is Important का महत्व बढ़े. पीएम मोदी ने कहा, सरकारी निर्णय से लाल बत्ती का जाना वो तो एक व्‍यवस्‍था का हिस्‍सा है, लेकिन हमें इसे मन से भी प्रयत्‍नपूर्वक बाहर निकालना है. हम सब मिलकर जागरूक प्रयास करें तो ये मन से भी निकल सकता है.

गौरतलब हो कि 30 वें मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने देशवासियों से बदलाव का अह्वान किया था. उन्होंने न्यू इंडिया के बारे में बात करते हुए कहा था कि सभी देशवासी अगर संकल्प करें और मिलकर कदम उठाते चलें, तो न्यू इंडिया का सपना हमारे सामने सच हो सकता है. हर कोई अपने नागरिक धर्म और कर्तव्य का पालन करे, यही अपने आप में न्यू इंडिया की एक अच्छी शुरुआत बन सकता है.’

30 वें मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने 21 वीं सदीं को भारत की सदी बनाने के लिए लोगों को संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया था. उन्होंने कहा था कि जब हम 21वीं सदी में जी रहे हैं, तब कौन हिन्दुस्तानी ऐसा होगा, जो भारत को बदलना नहीं चाहता होगा; कौन हिन्दुस्तानी होगा, जो देश में बदलाव के लिये हिस्सेदार बनना नहीं चाहता हो. सवा-सौ करोड़ देशवासियों की ये बदलाव की चाह, ये बदलाव का प्रयास, यही तो है, जो नये भारत, न्यू इंडिया, इसकी मज़बूत नींव डालेगा.

न्यू इंडिया न तो कोई सरकारी कार्यक्रम है, न ही किसी राजनैतिक दल का घोषणा पत्र है और न ही ये कोई प्रोजेक्ट है. न्यू इंडिया सवा-सौ करोड़ देशवासियों का आह्वान है. यही भाव है कि सवा-सौ करोड़ देशवासी मिलकर के कैसा भव्य भारत बनाना चाहते हैं. सवा-सौ करोड़ देशवासियों के मन के अन्दर एक आशा है, एक उमंग है, एक संकल्प है, एक चाह है.

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