अरूणाचल प्रदेश के 6 स्थानों के नाम बदलने के पीछे ये है चीन की चाल

दिल्ली

चीन सरकार ने अरुणाचल प्रदेश पर कब्जा करने की मुहिम शुरू कर दी है. इस मुहिम के चलते उसकी कोशिश अगले कुछ महीनों में अरुणाचल प्रदेश के कई शहरों के नाम बदलने के साथ-साथ पुराने जाली दस्तावेजों का सहारा लेकर दुनिया के सामने इन शहरों से हजारों साल पुराना नाता दिखाने की है.

चीन की इस कोशिश पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने टिप्पणी की है कि इस तरह से पड़ोसी देशों के शहरों का नाम बदलकर चीन अवैध कब्जों को वैध नहीं कर सकता.

चीन सरकार की इस मुहिम के चलते उसके विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह बहुत जल्द अरुणाचल के कई और शहरों का नया नाम जारी करने जा रहा है. चीन सरकार ने अरुणाचल प्रदेश में कई इलाकों के तिब्बती नामों का मैनडरिन में अनुवाद करने का सिलसिला शुरू किया है. इस कोशिश से वह एक तरफ तो तिब्बती लोगों के दावे को खारिज करने की कोशिश कर रहा है और दूसरी तरफ नए मैनडरिन नामों से अरुणाचल प्रदेश को चीन का हिस्सा स्थापित कर रहा है.

हालांकि, अरुणाचल प्रदेश के शहरों के तिब्बती नामों को बदलकर मैनडरिन करने की पूरी प्रक्रिया को चीन एक रुटीन अनुवाद बता रहा है. लेकिन उसके इस दावे को बीजिंग स्थित मिन्जू युनीवर्सिटी के एक प्रोफेसर जियॉन्ग कुनसिन ने इस दावे की हकीकत बयान कर दी है.

चीन के प्रोफेसर के मुताबिक, शहरों के नाम का अनुवाद करने की प्रक्रिया सिर्फ उन क्षेत्रों में चीन की संप्रभुता को कामय करने के उद्देश्य से किया जा रहा है. गौरतलब है कि चीन सरकार दावा करती है कि अरुणाचल प्रदेश चीन का हिस्सा है. चीन सरकार दावा करती है कि अरुणाचल प्रदेश तिब्बक का दक्षिणी हिस्सा है.

अपनी इसी कोशिश के चलते चीन सरकार ग्लोबल सर्च इंजन गूगल पर दबाव डालकर अथवा चीन में उसके लिए कारोबार बंद करने की धमकी देकर अरुणाचल प्रदेश के इन नए मैडरिन नामों को शामिल कराने की कोशिश कर सकता है. ऐसे कदम से चीन के लिए ग्लोबल फोरम पर अरुणाचल प्रदेश को अपने देश का हिस्सा साबित करने में आसानी होगी.

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