H-1B वीज़ा में सुधार पर ट्रंप की मुहर, भारतीय IT पेशेवरों पर गिर सकती है गाज

वॉशिंगटन

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने मंगलवार को अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों की रक्षा करने वाला कार्यकारी आदेश जारी कर दिया. इस कदम से भारतीय इंफोटेक इंड्रस्ट्री पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है.

कहा जा रहा है कि यह आदेश प्रभावी रूप से अमेरिका या वहां स्थित भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशी कामगारों को H-1B वीजा के तहत नौकरी दिए जाने पर रोक लगाने का काम करेगा.

हालांकि ट्रंप और उनके समर्थकों ने इस संभावना से इनकार किया है. उन्होंने इसका असली मकसद नौकरियों के लिए ज्यादा योग्य विदेश कामगारों को लाना और कंपनियों के प्रवेश स्तर पर अमेरिकी नागरिकों को अहमियत देना बताया है.

अमरिकियों की नौकरियों की रक्षा करने के वादे के प्रति अपनी निष्ठा दिखाने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप विस्कॉन्सिन राज्य के अपने पहले दौरे में कनोशा की एक फैक्टरी में गए. वहां उन्होंने ‘बाइ अमेरिकन, हायर अमेरिकन’ आदेश पर हस्ताक्षर किए. इस आदेश पर उनके हस्ताक्षर के बाद अमेरिका में H-1B वीजा जैसी सुविधा सीमित हो जाएगी और अमेरिकन कंपनियां अपने ही देश की कंपनियों और कामगारों से उत्पाद व सेवाएं लेंगी.

हालांकि, यह आदेश मेहमान कामगारों पर प्रतिबंध नहीं लगाता, लेकिन इससे प्रति वर्ष 85 हजार H-1B वीजा कामगार प्रभावित होंगे. इनमें आधे से ज्यादा वीजा भारतीयों के होते हैं. हालांकि आदेश में देरी होने की वजह से इस साल दिए जाने वाले वीजा पर असर नहीं पड़ेगा.

इसके अलावा यह आदेश H-2B वीजा के तहत अन्य मेहमान कामगारों को प्रभावित नहीं करेगा. H-4 वीजा को लेकर कुछ नहीं कहा गया है. इस (H-4) वीजा के तहत कामगारों के पति या पत्नि को भी निश्चित परिस्थितियों में अमेरिका में काम करने की अनुमति होती है.

ट्रंप के आदेश पर पत्रकारों से बात करते हुए अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा वीजा प्रोग्राम के तहत अमेरिका आने वाले आवेदकों को काम के लिए औसत वेतन से कम पैसा दिया जाता है. उन्होंने कहा कि इससे ना केवल अमेरिकी कामगारों का विस्थापन होता है बल्कि वेतन में भी कटौती होती है.

उधर भारतीय आईटी कंपनियों का दावा है कि H-1B कामगारों को कम वेतन दिया जाता है. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के इस आदेश से ज्यादा योग्य विदेशी इंजिनियर अमेरिका में आएंगे. हालांकि, इसके सर्टिफिकेशन के लिए अब उन्हें और कठिन प्रोसेस से गुजरना होगा. जबकि दूसरे विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इससे आउटसोर्सिंग (यानी उत्पादन में बाहर के नागरिकों की सेवाएं लेना) और बढ़ेगी.

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