ट्रेन लेट होने में भारतीयों ने तोड़ा रिकॉर्ड

भारतीय रेल पिछले कुछ साल से सबसे ज्यादा सुर्खियों में जिन वजहों से रही है, वह है उसकी बदलती हुई साफ-सफाई की व्यवस्था, उसमें परोसे जाने वाला महंगा लेकिन ब्रांडेड भोजन और रेल मंत्री सुरेश प्रभु के ट्वीट, जिनमें रेल में सफर कर रहे यात्रियों को एक ट्वीट-शिकायत पर बच्चे के दूध से लेकर दवाई तक उपलब्ध कराई गई.

लेकिन अपने कामकाज में कमी के बारे में दायर एक याचिका के जवाब में जब रेलवे ने यही दलीलें सुप्रीम कोर्ट में दीं तो 10 अप्रैल को देश की सबसे ऊंची अदालत ने पलट कर पूछा कि बुनियादी सेवाओं की बात बताइए. कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, ‘भारतीय रेल बुनियादी सुविधाओं के मामले में अंग्रेजी राज से भी बुरे दौर में पहुंच गई है.”

लेट होने में भारतीय रेल ने तोड़ा रिकॉर्ड
वेबसाइट के मुताबिक, 400 किमी से अधिक की यात्रा करने वालीं एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों के आंकड़े देखें तो 15 घंटे से अधिक लेट होने वाली ट्रेनों की संख्या पहली तिमाही में 2014 में 382, 2015 में 479 और 2016 में 165 थी, जबकि यही संख्या 2017 में बढ़कर 1,337 हो गई. यानी पिछले साल की तुलना में इस साल के पहले तीन महीने में 15 घंटे से ज्यादा लेट होने वाली ट्रेनों की संख्या में 810 फीसदी की वृद्धि हो गई. पिछले साल इसी अवधि में 10 से 15 घंटे तक लेट होने वाली ट्रेनों की संक्चया 430 थी जो इस साल बढ़कर 1,382 हो गई.

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