हमें नहीं मालूम कुलभूषण जाधव कहां और किस हाल में हैं: विदेश मंत्रालय

दिल्ली

विदेश मंत्रालय ने कहा कि नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव पाकिस्तान में किस जगह पर हैं और किस हाल में हैं, इस बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है और सरकार उन्हें वापस लाने के हरसंभव प्रयास कर रही है.

पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने कथित जासूसी की गतिविधियों के आरोप में 46 वर्षीय जाधव को मौत की सजा सुनाई थी. पाकिस्तान ने जाधव को मार्च 2016 में गिरफ्तार किया था. उसका आरोप है कि वह भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनलसिस विंग (रॉ) से जुड़े थे और यहां जासूसी तथा ‘विध्वंसकारी गतिविधियों में लिप्त’ थे.

विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘भारत को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि कुलभाषण जाधव कहां हैं और किस हाल में हैं. हम उन्हें वापस लाने के हरसंभव प्रयास कर रहे हैं लेकिन हम उन कदमों को सार्वजनिक नहीं कर सकते जो हम उठाएंगे.’

मंत्रालय के अनुसार, ‘हम इस अति महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपने उच्चायोग के माध्यम से पाकिस्तान के साथ संपर्क में हैं.’ जाधव को पाकिस्तान में फांसी की सजा सुनाये जाने के मुद्दे ने दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ा दिया है. भारत ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि इसका असर दोनों देशों के संबंधों पर पड़ सकता है तथा सरकार उन्हें बचाने के लिए अपनी हदों से आगे जाकर प्रयास करेगी.

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेज के प्रवक्ता स्टीफन डुजैरिक ने जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत की ओर से सुनाई गई मौत की सजा पर पूछे गए सवाल के जवाब में कल दैनिक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘इस मामले विशेष में हम प्रक्रिया पर निर्णय लेने या इस पर कोई रूख अख्तियार करने की स्थिति में नहीं हैं.’ सैन्य अदालत ने जाधव को आतंकवाद और जासूसी में उनकी कथित संलिप्तता को लेकर सेना कानून के तहत सजा सुनाई गई है.

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि कुलभूषण जाधव के पास 60 दिनों के भीतर अपील करने का अधिकार है तथा उन्होंने इस भारतीय नागरिक को सुनाई गई मौत की सजा को उचित ठहराया. सैन्य फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल के जरिए आतंकवाद एवं जासूसी के मामले में कथित संलिप्तता को लेकर सेना अधिनियम के तहत जाधव (46) को मौत की सजा सुनाई गई है.

सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने मौत की सजा की पुष्टि की है. आसिफ ने सीनेट में कहा कि जाधव के पास मौत की सजा के खिलाफ 60 दिनों के भीतर अपील करने का अधिकार है. उन्होंने भारत की इस चिंता को खारिज कर दिया कि जाधव के खिलाफ सुनवाई में उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया.

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