9,000 करोड़ जुटाने के बाद अब फ्लिपकार्ट की इसपर नजर, पढ़ें

अब तक के सबसे बड़े फंडिंग राउंड में 9,000 करोड़ रुपये जुटाने के बाद फ्लिपकार्ट की नजर ऐसे बिजनेस पर है, जिससे उसका आमना-सामना चीन की दिग्गज कंपनी अलीबाबा से हो सकता है। इसके साथ देश की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेल कंपनी एमेजॉन के मुकाबले बढ़त बनाए रखने के लिए कोर बिजनेस में भी निवेश बढ़ाएगी।

चीन की टेनसेंट और अमेरिकी फर्म ईबे इंक और माइक्रोसॉफ्ट की फंडिंग के बाद फ्लिपकार्ट का हौसला बढ़ा है। वह इस रकम का इस्तेमाल अपनी पेमेंट सब्सिडियरी फोनपे और प्राइवेट लेबल्स पोर्टफोलियो को बढ़ाने और फर्नीचर और ग्रॉसरी जैसी कैटेगरी को री-लॉन्च करने के लिए करेगी।

ग्रुप के सीईओ बिन्नी बंसल ने बताया, ‘हम ईबे के साथ मिलकर क्रॉस-बॉर्डर बिजनेस को बढ़ाने की कोशिश करेंगे। हम टेनसेंट के साथ पेमेंट बिजनेस के लिए पार्टनरशिप करेंगे।’ उन्होंने कोर ऑनलाइन रिटेल बिजनेस को दो साल के अंदर मुनाफे में लाने का लक्ष्य भी रखा है। सोमवार को बंसल और को-फाउंडर सचिन बंसल ने मेगा फंडिंग राउंड का ऐलान किया था। इसमें 10 साल पुरानी कंपनी की कीमत 11.4 अरब डॉलर लगाई गई। इससे दिल्ली बेस्ड राइवल कंपनी स्नैपडील को खरीदने की बुनियाद भी तैयार हो गई है। अगर यह डील सफल रहती है तो फ्लिपकार्ट के पाले में सॉफ्टबैंक जैसी दिग्गज इनवेस्टर आ जाएगी।

इससे भारतीय ई-कॉमर्स सेक्टर में त्रिकोणीय मुकाबले की जमीन भी तैयार हो जाएगी, जिसमें फ्लिपकार्ट के अलावा अमेरिकी एमेजॉन और चीन का अलीबाबा ग्रुप दूसरे प्लेयर्स हैं। एक्सपर्ट्स का भी कहना है कि फ्लिपकार्ट अब कंफर्टेबल पोजिशन में है और उसके पास एक्सपेरिमेंट के लिए फंड है। स्नैपडील के बोर्ड में शामिल रहे फॉर्मर वेंचर कैपिटल इनवेस्टर सुब्रमण्या एसवी ने कहा, ‘एमेजॉन बहुत एग्रेसिव है। ऐसे में फ्लिपकार्ट के पास खर्च बढ़ाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। अब फ्लिपकार्ट नए प्रयोग कर सकती है।’

पिछली बार कंपनी ने जुलाई 2014 और जुलाई 2015 के बीच रिकॉर्ड 2.4 अरब डॉलर का फंड जुटाया था। इससे कंपनी का वैल्यूएशन 2.6 अरब डॉलर से बढ़कर 15.2 अरब डॉलर हो गया था। तब कंपनी ने सिलिकॉन वैली से एग्जिक्यूटिव्स को हायर करने पर काफी पैसे खर्च किए थे। उसने कुछ समय तक मोबाइल ऐप ओनली स्ट्रैटेजी के साथ भी प्रयोग किया था। वहीं, उसका लॉस तब बढ़कर 7 करोड़ मंथली तक पहुंच गया था। हालांकि, ये बातें पुरानी हो चुकी हैं। बंसल का ध्यान अब बिजनेस को मुनाफे में लाने पर है।

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