भारत के अवैध शासन से नाराज है अरुणाचल की जनता: चीनी मीडिया

पेइचिंग

अरुणाचल प्रदेश के लोग भारत के ‘गैरकानूनी’ शासन से दुखी हैं और अपनी ‘मुश्किल जिंदगी’ से परेशान लोग चीन से मिलना चाहते हैं. यह दावा है चीन के एक सरकारी अखबार ‘चाइना डेली’ का. बुधवार को अखबार ने अपने एक लेख में बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा को अरुणाचल जाने की अनुमति देने के लिए भारत की आलोचना की.

चीन दलाई लामा को अरुणाचल में प्रवेश देने का विरोध कर रहा है. अरुणाचल, खासतौर पर तवांग में दलाई लामा को जाने देने की इजाजत देने पर चीन भड़का हुआ है. चीन ने भारत को चेतावनी दी थी कि वह दलाई लामा को अरुणाचल ना जाने दे, लेकिन भारत ने उसकी तमाम आपत्तियों को नजरंदाज कर दिया.

चीन अरुणाचल को तिब्बत का दक्षिणी हिस्सा बताता है. चीन और वहां की मीडिया लगातार दलाई लामा की इस यात्रा का विरोध कर रही हैं. दलाई लामा 9 दिन के अपने अरुणाचल दौरे पर हैं.

अपने लेख में ‘चाइना डेली’ ने लिखा, ‘भारत के गैरकानूनी और अवैध शासन के कारण दक्षिणी तिब्बत (अरुणाचल) के लोग बहुत मुश्किल जिंदगी जी रहे हैं. भारत द्वारा उनके साथ कई स्तरों पर भेदभाव किया जाता है. ये लोग वापस चीन में मिलना चाहते हैं.’

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इस लेख में चीन की कम्युनिस्ट सरकार के खिलाफ तिब्बत में लोगों द्वारा समय-समय पर किए जाने वाले मीडिया रिपोर्ट्स का जिक्र नहीं किया है. खबरों के मुताबिक, अब तक तिब्बत के 120 से भी ज्यादा लोग चीन के खिलाफ विरोध करते हुए आत्मदाह कर चुके हैं.

अखबार ने दलाई लामा के अरुणाचल दौरे का जिक्र करते हुए लिखा, ‘वह तवांग जिले को भारत के हवाले करने में देर नहीं करना चाहते.’ मालूम हो कि 1683 में छठे दलाई लामा का जन्म यहीं तवांग में हुआ था. तिब्बत के बौद्धधर्म के लिए तवांग काफी अहमियत रखता है.

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अखबार ने लिखा है, ‘अपने अलगाववादी संगठन का अस्तित्व बचाने के लिए भारत का समर्थन हासिल करने के एवज में दलाई लामा तवांग को उसके हवाले करने में देर नहीं करना चाहते.’ इसी लेख में दलाई लामा के लिए आगे लिखा गया है, ‘भावी पीढ़ियां इतिहास में इस 14वें दलाई लामा को मुश्किलें खड़ी करने वाले शख्स के तौर पर भी याद रखेंगी.’ मालूम हो कि 81 वर्षीय दलाई लामा इस परंपरा के 14वें धर्मगुरु हैं. उन्हें नोबल शांति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है.

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