27 साल बाद कोर्ट ने सुनाया फैसला, गैंगरेप को दोषियों को 3-3 साल की सजा

गैंगरेप पीड़िता को 27 साल बाद इंसाफ मिला। हिमाचल हाईकोर्ट ने नाबालिग से गैंगरेप में पांच लोगों को दोषी ठहराते हुए उन्हें 3-3 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोषियों को 50-50 रुपये जुर्माना अदा करने की सजा भी सुनाई है।

यह हर्जाना पीड़िता को देने के आदेश दिए गए हैं। न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी और न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर की खंडपीठ ने सत्र न्यायाधीश कुल्लू के फैसले को पलटते हुए रघुबीर सिंह, हरी राम, रवि प्रकाश, सुनील कुमार और विजय कुमार को यह सजा सुनाई है।

पीड़िता के अनुसार दोषियों ने 8 जुलाई 1989 को जब वह मनाली के एक वीडियो पार्लर में फिल्म देख रही थी वहां, उसे दोषी विजय कुमार ने शादी करने का झांसा दिया और उसे एक जिप्सी में रवि और मुन्ना के साथ बिठाकर सोलंगनाला की तरफ ले गया। सोलंग नाला पहुंचने पर जिप्सी को पार्किंग में खड़ा कर दोषी विजय कुमार ने उसके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया।

इसके बाद इन लोगों ने किया गैंगरेप
इसके पश्चात दोषी रवि कुमार और मुन्ना के साथ-साथ एक अन्य वैन में आए सुनील, बिट्टू और नीनु ने भी पीड़िता से गैंगरेप किया। इसके बाद टिक्कम, रघु महंत, मुना, रवि और नीनू ने फिर से पीड़ित के साथ दुष्कर्म किया।

किसी तरह पीड़िता दोषियों से बच कर घर पहुंची और घटना अपनी मां को बताई। दूसरे दिन मामला पुलिस थाना मनाली में दर्ज करवाया गया। मामला दर्ज होने पर अभियोजन पक्ष ने दोष साबित करने के लिए निचली अदालत में 10 गवाहों को पेश किया।

निचली अदालत ने साक्ष्यों को अपर्याप्त बताते हुए दोषियों को बरी कर दिया था। इस फैसले को सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी जिसे स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने फिर से ट्रायल कोर्ट को फैसला करने के आदेश दिए।

दोबारा निचली अदालत ने इन्हें साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। सरकार ने फिर से हाईकोर्ट में अपील दायर की, जिसे स्वीकारते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने साक्ष्यों को ठीक ढंग से नहीं परखा जिस कारण दोषियों को समय पर निचली अदालत से सजा नहीं हो पाई।

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