दिल्ली: GTB अस्पताल में मरीजों को लगाए गलत इन्जेक्शन, ये हो सकता है असर

अपनी बीमारी का इलाज कराने आए 22 मरीजों को दिल्ली सरकार के गुरु तेग बहादुर अस्पताल में गलत इंजेक्शन लगा दिया गया जिससे उनकी आंखों की रोशनी जाने का खतरा हो गया है।

डायबिटिक रेटिनोपैथी से पीड़ित 22 मरीज अपनी बीमारी के इलाज के लिए दिल्ली सरकार के गुरु तेग बहादुर अस्पताल पहुंचे थे लेकिन गलत इंजेक्शन लगने की वजह से मरीजों की आंखों की रोशनी जाने का खतरा बढ़ गया है।

ऐसे आठ मरीजों की सर्जरी एम्स के आरपी सेंटर में हुई, जिनकी आंखों की स्थिति ज्यादा खराब थी। बाकी मरीजों की आंखों की हालात खतरे से बाहर बताई जा रही है। 22 में 20 मरीज अभी भी जीटीबी और एम्स में भर्ती हैं जबकि दो मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद जीटीबी अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।

20 मरीजों को एम्स के आरपी सेंटर रेफर किया गया
इंजेक्शन लगने के बाद मरीजों की स्थिति खराब होने पर पर 20 मरीजों को एम्स के आरपी सेंटर रेफर किया गया था। आठ मरीजों की आंखों की सर्जरी की गई है। इनमें से पांच मरीज को सर्जरी के बाद जीटीबी रेफर कर दिया गया है।

इन मरीजों को फॉलोअप के लिए एम्स आना होगा। तीन मरीजों को सर्जरी के बाद निगरानी के लिए एम्स में ही रखा गया है। पूर्वी दिल्ली स्थित गुरु तेग बहादुर अस्पताल के निदेशक डॉ.सुनील कुमार ने बताया कि शनिवार को एक साथ डायबिटिक रेटिनोपैथी से पीड़ित 22 मरीजों को बीमारी आगे बढने से रोकने के लिए एवेस्टियन इंजेक्शन लगाया गया था।

एक दिन बाद सभी मरीजों को दवा के असर को जानने के लिए वापस अस्पताल बुलाया गया था। दूसरे दिन जब मरीज जांच कराने के लिए अस्पताल पहुंचे तो करीब-करीब सभी मरीजों की आंखों में संक्रमण था अथवा दवा की वजह से रिएक्शन हुआ था। आंखें लाल हो गई थी और आंखों से पानी भी आ रहा था।

आठ मरीजों की आंखों में ज्यादा दिक्कत थी
इसके बाद सभी मरीजों के आंखों की दुबारा से जांच की गई। आठ मरीजों की आंखों में ज्यादा दिक्कत थी लिहाजा बेहतर इलाज और सर्जरी के लिए एम्स के राजेन्द्र प्रसाद आई सेंटर में इनकी सर्जरी कराई गई। 22 में से दो मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

अगले एक-दो दिनों में कुछ और मरीजों को छुट्टी दे दी जाएगी। डॉ.कुमार का कहना है कि किसी भी मरीज की आंख की रोशनी इंजेक्शन देने की वजह से जाने का खतरा नहीं लगता। तुलसी, सीमा, ननकु, विनोद, रबिया और विजय पाल की आंखों में ज्यादा दिक्कत बताई जा रही है।

जीटीबी निदेशक ने बताया कि डायबिटिक रेटिनोपैथी के मरीजों की आंखों में लालीपन रहता है और ये आगे न बढ़े इसीलिए इंजेक्शन लगाई जाती है। उन्होंने बताया कि दवा में कोई गड़बड़ी थी या नहीं इसकी जांच के लिए दवा को लैब में भिजवा दिया गया है। अस्पताल-प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई जांच समिति नहीं बनाई गई है।

​इस बात की भी जांच की जा रही है कि दवा देने अथवा उसके सुरक्षित रखने में कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई जिसकी वजह से मरीजों को दिक्कत हुई। हालांकि इस लापरवाही के बाद भी मामले की जांच के लिए अस्पताल-प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई जांच समिति नहीं बनाई गई है।

दवा में गड़बड़ी अथवा अधिक देर तक खुले रहने से हो सकती है दिक्कत
एम्स आरपी सेंटर के प्रमुख डॉ. अतुल कुमार ने बताया कि मिलवाटी दवा की वजह से इस तरह की दिक्कत हो सकती है। संभव है कि सही तरीके से दवा को सुरक्षित न रखने से अथवा दवा देने के पहले अधिक देर तक दवा को खुले में रखा गया हो। इसके अलावा दवा के निर्माण के दौरान ही कुछ कमी रही हो। हालांकि यह जांच का विषय है।

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