सैनिकों की वर्दी सजाने के लिए सरकार ने लिया 7.60 लाख मेडल खरीदने का फैसला

लड़ाकू विमानों, पनडुब्बियों और हॉवित्जर जैसे मेगा हथियार प्रणालियों की खोज में अक्सर सैनिकों की बुनियादी जरूरतों व व्यक्तिगत सम्मान दोनों अक्सर सामान्य राजनीतिक-नौकरशाही उदासीनता के कारण भूल जाते हैं। लेकिन अब कुछ नए बैलिस्टिक हेलमेट्स और बुलेट प्रूफ जैकेट्स खरीदने के आदेश देने के बाद सरकार आखिरकार सैनिकों के लिए 7.60 लाख मेडल भी खरीदने जा रही है।

हालांकि जो काम पहले कर देना चाहिए था वह अब हो रहा है। फिर भी लगभग 28 करोड़ रुपये में 7.60 लाख मेडल की खरीद का सरकार का कदम स्वागत योग्य है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक एक वरिष्ठ सेना के अधिकारी ने बताया कि वे (हमारे सैनिक) इस विश्वास में जीते हैं कि जब जरूरत होगी वे अपनी जान न्यौछावर कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए 1999 में बर्फीले पहाड़ी कार्गिल पर मजबूती से घुसपैठ कर आए पाकिस्तानी घुसपैठियों को उखाड़ने के लिए हमारे सैनिकों ने सभी बाधाओं करीब-करीब मौत को गले लगाते हुए चढ़ाई की थी। यह बात एक आम नागरिक के लिए समझना बहुत मुश्किल है।”

लेकिन चिंताजनक रूप से पिछले साल 31 दिसंबर को सेना के तीनों अंगों के जवानों को दिए जाने वाले मेडल में भारी कमी देखी गई। खबर के मुताबिक करीब 16.82 लाख सेवा मेडल की कमी थी जोकि सेना के बहादुर जवानों को दिए जाने थे।

रक्षा मंत्रालय का कहना है कि लगभग 15 लाख मजबूत सशस्त्र बलों को मेडल देने के लिए 7.60 लाख और 9.89 लाख मेडल की खरीद के लिए दो अलग-अलग प्रस्ताव हैं। 7.60 लाख मेडल की खरीद के लिए पहला टेंडर सोमवार को रक्षा मंत्रालय के सैन्य निदेशालय और प्रपत्र द्वारा जारी किया गया है।

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