हरियाणा खेल नीति: ‘डेफ एंड डंब’ खिलाड़ियों को मिलेंगे ये फायदे

खेल एवं युवा मामले विभाग के अनुसार डैफलिंपिक गेम्स को भी पॉलिसी में ओलिंपिक और पैरालिंपिक के बराबर स्थान दिया है। डैफलिंपिक में गोल्ड मेडल लाने पर 6 करोड़ रुपए और अन्य मेडल पर नियमानुसार इनाम नौकरी आदि दी जाएगी।

डैफलिंपिक वीरेंद्र सिंह दो बार ला चुके गोल्ड मेडल: खेल विभाग के मुताबिक झज्जर जिले में सासरोली निवासी वीरेंद्र सिंह वर्ष 2005 में मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया) और 2013 में बुल्गारिया में हुए डैफलिंपिक खेलों में रेसलिंग में गोल्ड मेडल ला चुके हैं। उन्हें अर्जुन अ‌वाॅर्ड भी मिल चुका है। इस पॉलिसी के बाद अब उनके जैसे कई खिलाड़ियों को फायदा होगा।

प्रदेशके दिव्यांग (गूंगे-बहरे) खिलाड़ियों को भी अब अंतरराष्ट्रीय खेलों में मेडल जीतने पर ओलिंपिक, पैरालिंपिक खिलाड़ियों के बराबर इनाम, नौकरी और अन्य सुविधाएं मिलेंगी। प्रदेश सरकार ने ‘डैफलिंपिक’ खेलों को भी अपनी खेल नीति में शामिल कर लिया है।

खेल मंत्री अनिल विज की पहल पर भेजे गए खेल विभाग के एक प्रस्ताव को सीएम मनोहर लाल ने मंजूरी दी है। इस फैसले से राज्य के कई दिव्यांग खिलाड़ियों को जीने का नया उत्साह मिलेगा। खेल एवं युवा मामले विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी केके खंडेलवाल ने बताया कि अभी तक राज्य की खेल नीति में डैफलिंपिक खेल शामिल नहीं थे। दिक्कत ये रही थी कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताओं में ज्यादातर सिग्नल सीटी बजाकर दिए जाते हैं। जबकि डैफलिंपिक के खिलाड़ी सीटी की आ‌वाज सुन नहीं पाते हैं। इनकी प्रतियोगिताओं में फ्लैग अथवा टॉर्च की रोशनी से सिग्नल दिया जाता है। प्रदेश में कुछ खिलाड़ियों की मांग थी कि खेल नीति में डैफलिंपिक गेम्स को भी शामिल किया जाए। पिछले दिनों भी में गोल्ड मेडल विजेता ए‌वं अर्जुन अ‌वाॅर्डी वीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में कुछ खिलाड़ियों ने खेल मंत्री अनिल विज से मिलकर यह मांग उठाई थी।

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