ऐसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं मोसुल में ISIS के कब्जे में फंसे 4 लाख इराकी

मोसुल में करीब चार लाख लोग बिना किसी गलती के भूखमरी झेल रहे हैं। इन्हें इतनी आजादी भी नहीं कि अपनी जान बचाने के लिए यहां से भागने का जोखिम उठा सकें। अपने घरों में बंद और अनाज-पानी जैसी बुनियादी चीजों के अभाव में नारकीय हालातों से दो-चार हो रहे इन लोगों लोगों की मजबूरी है कि वे अपनी जान बचाने के लिए मोसुल से बाहर नहीं जा सकते, लेकिन उनकी मुश्किलें बस इतने पर ही खत्म नहीं होतीं। इस्लामिक स्टेट (ISIS) ने इस सबों को अपने बचाव के लिए बंधक बनाकर रखा है। ये सभी इतनी बदहाली में हैं कि आसपास चल रही लड़ाई कहां तक पहुंची, यह पता करने की भी उनमें शायद कोई सुध नहीं बची है। एक ओर जहां इराकी सेना और IS जंग के मद्देनजर अपनी-अपनी योजनाएं बनाने में लगे हैं, तो वहीं दूसरी ओर यहां फंसे लाखों इराकी नागरिक जीते-जी नर्क जैसी स्थितियां भोग रहे हैं। किसी को नहीं मालूम कि मोसुल की यह लड़ाई अभी कितनी लंबी खिंचेगी। जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, वैसे-वैसे पश्चिमी मोसुल और ज्यादा बर्बाद होता जा रहा है। सारी अनिश्चितताओं के बीच बस एक ही चीज निश्चति है और वह है यहां फंसे मासूम लोगों की चारों तरफ से हो रही दुर्दशा।

खाने को कुछ नहीं, तो साबुत गेहूं पानी में भिगोकर यूं ही खा ले रहे हैं लोग
इसी हिस्से में रहने वाले 39 साल के ओमर ने ‘द इंडिपेंडेंट’ अखबार को दिए गए इंटरव्यू में बताया कि बिजली सप्लाइ बंद होने के कारण घर अंधेरे में डूबे हुए हैं। फोन पर बात करते हुए ओमर ने अखबार को बताया, ‘यह मेरा आखिरी फोन कॉल है आपको। बिजली नहीं है और ना ही जेनरेटर चलाने के लिए पेट्रोल ही बचा है। इसके बाद फोन चार्ज कर पाना मुमकिन नहीं हो पाएगा।’ ओमर ने बताया कि लड़ाई उनके हर दिन का हिस्सा जरूर है, लेकिन इसके बावजूद यहां किसी को नहीं मालूम है कि लड़ाई की स्थिति क्या है। ओमर कहते हैं, ‘बच्चे भूख से रो रहे हैं और घर में आटा तक नहीं बचा। हमारे पास गेहूं है। हम वही गेहूं पानी में भिगो देते हैं, फिर जब वह थोड़ा मुलायम हो जाता है, तो हम उसे बच्चों को खिला देते हैं।’ ओमर द्वारा दी गई जानकारियां बेहद खौफनाक तस्वीर पेश करती हैं। लोग ना यहां से भागकर बाहर जा सकते हैं और ना यहां जीने की हालत में हैं।

लोगों को नहीं पता, कहां तक पहुंची लड़ाई
ओमर ने बताया, ‘हमें बाहर से आती हुई धमाकों की आवाजें सुनाई देती हैं, लेकिन किसी को नहीं पता कि कौन लड़ रहा है। एक बूढ़ी महिला कल हमारे यहां आई। उन्होंने बताया कि घर के आसपास कोई नहीं लड़ रहा और इराकी सेना ने पश्चिमी मोसुल के इस इलाके की ओर बढ़ना बंद कर दिया है।’ इराकी गठबंधन सेना अब IS के मुख्य गढ़ पश्चिमी मोसुल में पहुंच चुकी है। पतली-संकरी गलियों और बेहद तंग जगह वाले इस इलाके के अंदर घुस पाना इराकी सेना के लिए अभी मुमकिन नहीं हो सका है। 2014 में जिस मोसुल को उन्होंने IS के लड़ाकों के हाथों गंवा दिया था, उसे फिर से हासिल करने की यह मुहिम अक्टूबर 2016 में शुरू हुई।

IS ने घरों पर किया कब्जा, लोगों को सेना का इंतजार
यहां फंसे लोग सेना का इंतजार कर रहे हैं। उनकी आखिरी आस यही है कि सबकुछ खत्म हो जाने से पहले सेना आकर उन्हें बचा ले। ओमर ने बताया, ‘हम जानते हैं कि यारमूक जिले में सेना लड़ रही है, लेकिन हमारे जिले के आसपास तो पुलिस तैनात है। पिछले एक हफ्ते से यहां की स्थितियां जस की तस हैं। सेना यहां आ ही नहीं रही।’ ओमर ने बताया कि बाहर से धमाकों की आवाजें तो आती हैं, लेकिन कोई भी बाहर जाकर नहीं देख सकता। ओमर के मुताबिक, ISIS के आतंकियों ने पिछले हफ्ते लोगों के घर खाली करवा लिए और तीन-चार परिवारों को एकसाथ एक घर में रहने का निर्देश दिया। अब कई घरों को IS ने अपने कब्जे में ले लिया है। यहां IS ने जैसे हर घर को युद्ध के मोर्चे में तब्दील कर दिया। घरों में छेद बना दिए गए हैं। घरों में छुपे IS आतंकी इन्हीं छेदों का सहारा लेकर गोली चलाते हैं। दोनों पक्ष जहां अपनी-अपनी युद्ध नीति बनाने में व्यस्त हैं, वहीं मोसुल में फंसे 4 लाख से ज्यादा लोगों की मजबूरी यह है कि वे बहुत मजबूर हैं। ना उन्हें अपने लिए कोई फैसले लेने का अधिकार है और ना ही वे इस स्थिति में हैं कोई फैसला ले सकें। फिलहाल तो वे बस अपने दिन गिन रहे हैं।

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