आपके काम की बात, आज से हुए ये 7 बदलाव

शनिवार से कई अहम बदलाव लागू हो गए। अब से देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई में महीने में 3 से ज्यादा फ्री ट्रांजैक्शन का चार्ज देना होगा। वहीं, एसबीआई में 6 बैंकों का विलय भी होना है। कैश ट्रांजैक्शन लिमिट 3 लाख से घटकर 2 लाख हो सकती है। साथ ही, अब आपको कार-बाइक और हेल्थ इन्श्योरेंस के लिए ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। राहत की खबर ये है कि अब मेल-एक्सप्रेस के किराए में राजधानी-शताब्दी में सफर हो सकेगा। सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के मुताबिक, शनिवार से ही बीएस-III नॉर्म वाली गाड़ियां नहीं बिकेंगी।

ये 7 बदलाव हुए

1# फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट 3 हुई
– देश का सबसे बड़ा बैंक SBI एक अप्रैल से होम ब्रांच में हर महीने तीन से ज्यादा फ्री कैश ट्रांजैक्शन नहीं करने देगा।
– अगर आप महीने में 3 से ज्यादा ट्रांजैक्शन करते हैं, तो आपको प्रति ट्रांजैक्शन 50 रुपए चुकाने होंगे।

2# एसबीआई में 6 बैंकों का विलय
– शनिवार को ही एसबीआई में 6 बैंकों का विलय होने जा रहा है। विलय होने वाले बैंकों के कस्टमर अब से एसबीआई के कस्टमर होंगे।
– जिन बैंकों का विलय हो रहा है, उनमें स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, भारतीय महिला बैंक, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला और स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर शामिल हैं।
– 5 बैंकों के विलय से एसबीआई का एसेट बेस करीब 37 लाख करोड़ रुपए (555 अरब डॉलर) होगा। साथ ही 22500 ब्रांच और 58 हजार एटीएम होंगे। नए बैंक के 50 करोड़ से ज्यादा कस्टमर होंगे। इसके बाद एसबीआई दुनिया के टॉप-50 बैंकों में शामिल हो जाएगा।

3# अकाउंट में मिनिमम बैलेंस नहीं तो लगेगा जुर्माना
– अगर एसबीआई में आपका अकाउंट है तो एक अप्रैल से आपको अकाउंट में मिनिमम बैलेंस रखना होगा। केंद्र सरकार ने कहा था कि अकाउंट्स में मिनिमम बैलेंस नहीं रहने पर बैंक पेनल्टी लगा सकते हैं, लेकिन इस पर लगाई जाने वाली लेवी रीजनेबल होना चाहिए। सर्विस देने की एवरेज कॉस्ट के हिसाब से ही जुर्माना होना चाहिए। फाइनेंस मिनिस्टर (स्टेट) संतोष कुमार गंगवार ने राज्यसभा में यह जानकारी दी थी।
– गंगवार ने कहा था कि आरबीआई की गाइडलाइन के मुताबिक, मिनिमम बैलेंस की रकम में बदलाव की जानकारी अकाउंटहोल्डर्स को एक महीने पहले देनी चाहिए। यह भी बताएं कि खाते में तय रकम नहीं रखने पर कितनी पेनल्टी वसूली जाएगी।
– बता दें कि देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई समेत देश के कई बैंक मिनिमम बैलेंस नहीं रखने पर जुर्माना वसूलने जा रहे हैं।
– मेट्रो सिटीज में एसबीआई अकाउंट होल्डर्स को मिनिमम 5,000 रुपए बैलेंस रखना होगा। वहीं, अर्बन एरिया में यह लिमिट 3,000, सेमी-अर्बन एरिया में 2,000 रुपए रहेगी।

4# कैश ट्रांजैक्शन की लिमिट
– केंद्र सरकार का प्रपोजल है कि कैश ट्रांजैक्‍शन लिमिट को 3 लाख रुपए से घटाकर 2 लाख रुपए कर दिया जाए। यानी 2 लाख रुपए से ज्यादा के कैश ट्रांजैक्‍शन अमाउंट को इलीगल माना जाएगा। तय लिमिट से जितना ज्यादा कैश ट्रांजैक्‍शन होगा, उतनी ही पेनल्टी लगेगी।
– फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने मंगलवार को फाइनेंस बिल पेश किया था। इस बिल में कैश ट्रांजैक्‍शन की लिमिट में बदलाव को प्रपोज किया गया था।
– बता दें कि केंद्र सरकार ने ब्लैक मनी पर लगाम लगाने को लेकर एक एसआईटी गठित की थी। इसने भी अपनी सिफारिश में 3 लाख रुपए से ज्यादा के कैश लेन-देन पर रोक लगाने को कहा था।
– पेनल्टी की रकम उतनी ही होगी, जितनी एक्‍स्‍ट्रा रकम कैश में ली गई है। यानी अगर किसी ने 5 लाख रुपए कैश में लिए हैं, तो उसे 3 लाख रुपए की पेनल्टी देनी पड़ेगी।

5# मेल-एक्सप्रेस के किराए में राजधानी-शताब्दी में सफर
– शनिवार से इंडियन रेलवे ने ‘विकल्प’ स्कीम लॉन्च कर दी।
– इसके तहत वो पैसेंजर भी शताब्दी और राजधानी एक्प्रेस जैसी लग्जरी ट्रेन में सफर कर सकेंगे, जिनके पास मेल या एक्सप्रेस ट्रेन के टिकट हैं।
– रेलवे का कहना है कि इस स्कीम से उसे टिकट रिफंड कम करना पड़ेगा जो सीधे तौर पर रेलवे के लिए फायदेमंद साबित होगा।
– विकल्प स्कीम के तहत वो वेटिंग टिकट वाले पैसेंजर अगली अवेलेबल ट्रेन में कन्फर्म सीट पा सकते हैं। लेकिन इसके लिए आपको टिकट बुकिंग के वक्त ही जानकारी देनी होगी कि आप विकल्प स्कीम लेना चाहते हैं।
– इस फैसिलिटी से बिना एक्स्ट्रा चार्ज दिए शताब्दी या राजधानी जैसी लग्जरी ट्रेनों में सफर किया जा सकेगा। फिलहाल, ये सुविधा ऑन लाइन टिकट पर ही है। लेकिन रेलवे जल्द ही इसे बुकिंग काउंटर से भी शुरू होगा। इसके लिए सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है।
– एक रेलवे अफसर के मुताबिक, हम हर साल टिकट कैंसिलेशन पर 7,500 करोड़ रुपए रिफंड देते हैं। ये तब होता है, जबकि कई बिजी रूट्स पर भी कई ट्रेनों में बर्थ खाली रहती हैं। । इस स्कीम से बर्थ भी खाली नहीं रहेंगी और पैसेंजर का सफर भी पूरा हो जाएगा। दोतरफा फायदा होगा। रिफंड बचना मुनाफा ही है।

6# कार, बाइक और हेल्थ इन्श्‍योरेंस प्रीमियम महंगा
– शनिवार से कार, बाइक और हेल्थ का इन्श्‍योरेंस प्रीमियम महंगा हो गया। इन्श्योरेंस रेग्युलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDAI) ने इसके लिए मंजूरी दे दी। हालांकि, कमीशन ने ये भी साफ किया कि बदलाव के बाद भी प्रीमियम में 5% से ज्यादा की बढ़ोत्तरी नहीं की जा सकेगी।
– IRDAI का कहना है कि बीमा कंपनियां एजेंट को दिए जाने वाले कमीशन और रिम्यूनरेशन रेट का रिवीजन कर सकती हैं।
– IRDAI के मुताबिक, बीमा कंपनियों को यह भी सर्टिफिकेट देना होगा कि जो पॉलिसी पहले सोल्ड हो चुकी हैं, उनमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया जाएगा। सर्टिफिकेट में यह भी साफ बताना होगा कि प्रीमियम रेट में इस तरह का कोई बदलाव नहीं होगा, जिससे पॉलिसी होल्डर को नुकसान हो।
– वहीं कार, बाइक इन्श्‍योरेंस का प्रीमियम बढ़ने के साथ ही 1 अप्रैल से थर्ड पार्टी इन्श्‍योरेंस भी महंगा हो गया है।

7# अब BS-III नॉर्म वाली गाड़ियां नहीं बिकेंगी
– सुप्रीम कोर्ट ने लोगों की सेहत का हवाला देकर देशभर में बीएस-3 गाड़ियां बेचने और उनके रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दी। एक अप्रैल से सिर्फ बीएस-4 इमिशन स्टैंडर्ड वाली गाड़ियां ही बेची और रजिस्टर्ड हो सकेंगी।
– कंपनियों के स्टॉक में बीएस-3 की करीब 8.24 लाख गाड़ियां हैं। करीब 12 हजार करोड़ रुपए के नुकसान की दुहाई देते हुए उन्होंने यह स्टॉक बेचने की मंजूरी मांगी थी। लेकिन जस्टिस एमबी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने मांग खारिज कर दी।
– बेंच ने कहा, “कंपनियों के फायदे के लिए लोगों का स्वास्थ्य खतरे में नहीं डाल सकते। कंपनियां जानती थीं कि 1 अप्रैल, 2017 से सिर्फ बीएस-4 गाड़ियां ही बिकेंगी। फिर भी स्टॉक क्यों बढ़ाते रहे?”
– सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) एवं अन्य ने स्टॉक निकालने की इजाजत मांगी थी। वहीं, बजाज ने बीएस-4 तकनीक पर इन्वेस्टमेंट का हवाला देकर बीएस-3 पर रोक की मांग की।
– उधर, केंद्र ने ऑटो कंपनियों का समर्थन करते हुए कहा कि 1 अप्रैल के बाद बीएस-3 वाहन के प्रोडक्शन पर रोक है, बिक्री और रजिस्ट्रेशन पर नहीं।
– बता दें कि 2010 से मार्च, 2017 तक 41 कंपनियों ने 13 करोड़ बीएस-3 व्हीकल्स बनाए हैं।

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